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चंदो ताल में ‘विकास’ का घोटाला: करोड़ों डकार गए जिम्मेदार, खंडहर में तब्दील हुआ ऐतिहासिक स्थल!

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पक्षी विहार: टूटी बेंच, बदहाल शौचालय और अंधेरे में डूबा चंदो ताल!

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ऐतिहासिक चंदो ताल: करोड़ों डकार गए जिम्मेदार, बदहाली पर रो रहा पर्यटन स्थल

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • सरकारी धन की लूट का ‘ताल’: कागजों पर चमका पर्यटन स्थल, धरातल पर कबाड़ हुआ ओपन जिम!
  • साहब! कहाँ गए करोड़ों रुपये? चंदो ताल की बदहाली देख शर्मसार हुआ बस्ती जनपद!
  • पुराने ईंटों से ‘नया’ निर्माण: चंदो ताल में भ्रष्टाचार की इंटरलॉकिंग, जिम्मेदार साधे हैं चुप्पी!
  • पर्यटन के नाम पर बड़ा खेल: न पीने का पानी, न रोशनी; सिर्फ गंदगी का अंबार है चंदो ताल!
  • अजब गजब विकास: सायकिल स्टैंड गायब और कबाड़ में जिम, चंदो ताल की दुर्दशा पर रो रहे पर्यटक!
  • विभागीय लापरवाही का ‘ब्लैक होल’: करोड़ों खर्च होने के बाद भी अंधेरे में क्यों है चंदो ताल?

कप्तानगंज, बस्ती। उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए खजाना खोल रही है, वहीं दूसरी तरफ बस्ती जनपद का ऐतिहासिक चंदो ताल सरकारी लापरवाही और विभागीय भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। कागजों पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन धरातल पर स्थिति ‘ढाक के तीन पात’ वाली है। आज यह मनोरम स्थल पर्यटकों के लिए नहीं, बल्कि अव्यवस्थाओं और गंदगी का अड्डा बनकर रह गया है।

करोड़ों स्वाहा, फिर भी अंधेरे में पक्षी विहार

हैरानी की बात यह है कि विकास के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट इस कदर हुआ कि परिसर में लगी बेंच टूट चुकी हैं और ओपन जिम का कीमती सामान अब कबाड़ में तब्दील हो रहा है। रात होते ही पूरा ताल क्षेत्र घुप अंधेरे में डूब जाता है, क्योंकि प्रकाश की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं है। सवाल यह उठता है कि आखिर वो करोड़ों रुपये कहाँ गए जो इस स्थल के कायाकल्प के लिए आए थे?

सफेद हाथी साबित हो रही सुविधाएं

चंदो ताल की दुर्दशा की फेहरिस्त काफी लंबी है:

  • पीने का पानी: परिसर में लगा इण्डिया मार्का हैण्डपम्प सालों से खराब पड़ा है। प्यास बुझाने के लिए पर्यटकों को दर-दर भटकना पड़ता है।
  • शौचालय की बदहाली: शौचालय की सीटें टूटी हुई हैं और चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा है। स्वच्छता अभियान के दावों की यहाँ सरेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
  • घटिया निर्माण: इंटरलॉकिंग कार्य में पुराने ईंटों का धड़ल्ले से प्रयोग किया गया है, जो सीधे तौर पर बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।
  • गायब सुविधाएं: सायकिल स्टैंड का कहीं पता नहीं है और मनोरमा पार्क अब केवल गंदगी का ढेर बनकर रह गया है।

जिम्मेदारों की ‘मौन’ सहमति?

कप्तानगंज ब्लॉक स्थित इस चंदो ताल की दुर्दशा पर स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग ने अपनी आँखें मूंद रखी हैं। क्या अधिकारियों को टूटी बेंचें और कबाड़ होता जिम नजर नहीं आता? या फिर भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में सबने हाथ धो लिए हैं?

स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस ऐतिहासिक धरोहर की सुध न ली गई और भ्रष्टाचार की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। आखिर कब तक विकास के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई को चंद सफेदपोश और लापरवाह अधिकारी लूटते रहेंगे?

मुख्य बिंदु

  • कागज पर विकास, हकीकत में विनाश: चंदो ताल बना भ्रष्टाचार का अड्डा।
  • टूटी बेंच और कबाड़ होता जिम, क्या यही है बस्ती का पर्यटन मॉडल?
  • जिम्मेदार मौन, जनता बेहाल; आखिर कहाँ गया विकास का पैसा?
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