
अजीत मिश्रा (खोजी)
💫 05 दिसंबर 25 से आज तक मिल प्रबंधन द्वारा नहीं किया गया गन्ना किसानों को पर्चियों का वितरण।
।। गन्ना किसानों को गन्ने की पर्चियां जारी नहीं हो रही हैं, जिसके कारण गन्ना सप्लाई रुक गई है। गन्ना क्रय केंद्रों पर तोल न होने से ट्रालियों की लंबी लाइनें लग गई हैं। किसान अधिकारियों से कई बार शिकायत।।
💫 शिवपुर – टिनिच गन्ना क्रय केंद्र पर उतरवाई न मिलने से बभनान मिल प्रबंधन ने बंद किया पर्ची वितरण।।
11 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।
बभनान – बस्ती ।। गन्ना किसानों को गन्ने की पर्चियां जारी होने के मैसेज न मिलने की वजह से गन्ना सप्लाई रुक गई है। जिसकी वजह से गन्ना किसान परेशान हैं। वही गन्ना क्रय केंद्रों केंद्रों पर तोल न होने की वजह से गन्ने की ट्रालियों की लंबी लाइन होती जा रही है। गन्ना विभाग के अधिकारी गन्ना किसानों की समस्याओं को दूर नहीं कर पा रहे हैं। सबसे ज्यादा किसानों की समस्या जिले की एक स्थानीय चीनी मिल एवं एक बाहरी चीनी मिल से है। इन दिनों चीनी मिलों के गन्ना के क्रय केंद्रों पर किसान गन्ना सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। इसका कारण है कि किसानों को मैसेज नहीं मिल रहा है। गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ने की तोल ना होने की वजह से गन्ने की ट्रालियों की अधिक संख्या हो गई है। पर्ची जारी न होने की शिकायत गन्ना किसानों ने परेशान होकर गन्ना मिल के अफसरों एवं गन्ना विभाग के अधिकारियों से कई बार की लेकिन अनसुनी की जा रही है
मिलों द्वारा उतरवाई (ट्रांसपोर्टेशन चार्ज) न देने या अनियमित भुगतान के कारण किसानों को समय पर गन्ना पर्ची नहीं मिल पा रही है, जिससे खेतों में कटा गन्ना सूख रहा है, गेहूं की बुवाई प्रभावित हो रही है और किसान मजबूरी में अपना गन्ना सस्ते दामों पर कोल्हू को बेचने या मिलों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी मेहनत बर्बाद हो रही है और आर्थिक नुकसान हो रहा है।
समस्या के मुख्य कारण:
उतरवाई के भुगतान में देरी/अनियमितता: मिलें किसानों को गन्ने की ढुलाई का पैसा समय पर नहीं देतीं, जिससे किसान हतोत्साहित होते हैं और पर्ची मिलने में दिक्कत आती है।
पर्ची वितरण में पारदर्शिता की कमी: कई बार किसानों को उनकी बोई हुई मात्रा के अनुसार समय पर पर्ची नहीं मिलती, जिससे गन्ना खेत में खड़ा रह जाता है।
तकनीकी समस्याएँ: मोबाइल नेटवर्क या इनबॉक्स फुल होने के कारण एसएमएस पर्ची न मिलना भी एक कारण है।
मिलों की क्षमता और प्रबंधन: मिलों में खराबी या कम खपत के कारण भी पर्ची जारी होने में देरी होती है, जिससे किसानों को परेशानी होती है।
किसानों पर असर:
आर्थिक नुकसान: किसान खेतों में कटा गन्ना सूखने के कारण उसे सस्ते दामों पर बेचने या स्थानीय कोल्हू को देने को मजबूर होते हैं।
अगली फसल प्रभावित: गन्ने की कटाई और बिक्री में देरी से अगली फसल, जैसे गेहूं की बुवाई प्रभावित होती है।
परेशानी और समय की बर्बादी: किसान पर्ची के लिए मिलों और गन्ना समितियों के चक्कर काटते रहते हैं।
मिल द्वारा ‘उतराई’ (संभवतः अवैध उगाही या कमीशन) की मांग करना या इसके अभाव में पर्ची रोकना गैरकानूनी है।यह मामला उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का है, जहां पर उतरवाई न देने के कारण मिलों में गन्ने की पर्ची नहीं मिल रही है। इससे गन्ना किसानों को परेशानी हो रही है। आप संबंधित अधिकारियों से संपर्क करके इस मामले में जानकारी ले सकते हैं और अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं।
गन्ने की खेती (sugarcane Farming) करने वाले किसानों के लिए बहुत ही जरूरी खबर निकल कर सामने आ रही है। इस समय गन्ना पेराई सत्र चल रहा है। ऐसे में किसानों से चीनी मिले गन्ने की खरीद कर रही है जिसके लिए किसानों को गन्ना पर्ची (sugarcane slip) का एसएमएस (SMS) भेजा जा रहा है। लेकिन कई किसानों को गन्ना पर्ची का एसएमएस (sugarcane slip sms) प्राप्त नहीं हो पा रहा है जिससे किसानों को अपनी गन्ने की फसल बेचने में परेशानी आ रही है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने गन्ना किसानों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं ताकि गन्ना किसानों को गन्ना बेचने में काेई परेशानी नहीं हो और उन्हें मोबाइल पर गन्ना पर्ची का एसएमएस (sugarcane slip sms) घर बैठे मिल सके ताकि वह निश्चित समय पर अपना गन्ना बेचने के लिए आए, जिससे उनका समय खराब न हो और समय पर आसानी से गन्ने की खरीद की जा सके। ऐसे में गन्ना किसानों के लिए गन्ना पर्ची से संबंधित सभी महत्वपूर्ण बातों को जानना बेहद जरूरी है। साथ ही इससे संबधित दिशा-निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक है ताकि वे बिना किसी रूकावट के गन्ने का विक्रय कर सकें।














