
आजादी के इतने साल बाद भी परलाबाड़ी के सिंघिमारी गांव को नहीं मिली पक्की सड़क. आगामी विधानसभा चुनाव का ग्रामीण करेंगे बहिस्कार|
पोठिया प्रखंड अंतर्गत कोल्था पंचायत के नन्हागुड़ी, सिंघिमारी, रंगामणि, बुवालमारी, डोक नदी के किनारे बसे चार गाँव के लोग वर्षो से जर्ज़र सड़क की समस्या से है परेशान गाँव के मरीज अस्पताल सेवा से रहते है वंचित वही रास्ते मे जलजमाव के कारण बच्चे नहीं जा पाते है विद्यालय वही थोड़ी दूर परलाबाड़ी पंचायत अंतर्गत सिंघिमारी गांव के लोगों को आज भी मुख्य सड़क तक आने जाने के लिए पक्की सड़क नसीब नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने कहा सड़क नहीं होने से लोगो को कई जान गवानी पड़ी है गाँव मे सड़क नहीं होने से यहाँ की लड़कियो की नहीं हो रही है शादी, हर सरकारी लाभ से यहाँ के ग्रामीण है वंचित है.चुनाव मे नेता द्वारा हम लोगो से बस वोट लिया जाता है. हमलोगो के साथ सौतेला वय्वहार किया जाता है|
किशनगंज: पोठिया प्रखंड अंतर्गत कोल्था पंचायत के डोक नदी के पास बसे गाँव नन्हागुड़ी, सिंघिमारी, रंगामणि, बुवालमारी, मे वर्षो से सड़क जर्ज़र है जिससे ग्रामीणों को कई असुविधा का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में तो इस गांव के लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। इस गांव के अधिकतर लोग मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं। हालांकि कोल्था पंचायत सीमा तक पंद्रह साल पहले सड़क का कार्य करवाया गया था। लेकिन आज उस सड़क की स्थित काफी दयनीय है। चुनाव के वक्त वोट के लिए नेताओं की लंबी लाइन लग जाती है बोलने पर आश्वासन के शिवा कुछ नहीं मिलता लेकिन चुनाव खत्म होते ही फिर सब भूल जाते हैं। ग्रामीण बताते है कि इस गांव में जब किसी की शादी में बारात आती है या बारात निकलती है तो मुसीबत हो जाती है। दूल्हे या दूल्हन को गांव से मुख्य सड़क पर पैदल ही जाना पड़ता है इसको लेकर दूसरे गाँव के लोग अब इस गाँव मे शादी नहीं करना चाहते है जिससे कई लड़किया बिन ब्याही घर मे बैठी है। ग्रामीणों की सुने लेकिन आज तक सिंघिमारी आदिवासी टोला, शेरसाहवादी टोला, सुरजापुरी टोला, से मुख्य सड़क पर जाने के लिए पक्की सड़क नहीं बनी। चुनाव में नेता लोग वादा कर के जाते हैं और चुनाव जीतने के बाद भूल जाते हैं। सिंघिमारी, बुवालबाड़ी, एवं रंगामणि, के गांव में रास्ता ना रहे के कारण बरसात के दिन में गाँव के बहु-बेटी को बहुत परेशानी होती है। कीचड़ माटी पानी पार करके घरे से पक्की सड़क पर जाना होता है। जिससे कई बार गाँव वासी दुर्घटना का शिकार हो चुके है. इस गाँव मे कोई बिमार हो जाने से गाँव मे एम्बुलेंस आने से मना कर देता है इसको लेकर लोगो को कई जाने गावनी पड़ी है. गाँव के आदिवासी महिलाओं ने कहा के हमारे साथ यहाँ के नेता लोग सौतेला वय्वहार कर रहे है हमें हर सरकारी लाभ से वंचित रखा गया है बस हमें बहला-फुसलाकर चुनाव के समय वोट ले लेते है और बाद मे हमें भूल जाते है. अगर हम ग्रामीणों का रास्ता नहीं बना तो आगामी विधानसभा चुनाव का हम सब मिलकर बहिस्कार करेंगे किसी नेता की अगली बार हमारे गाँव मे जाने पर रोक लगा देंगे| अन्यथा हमारे हज़ारो की आबादी वाले गाँव की समस्या का समाधान किया जाएं हम सबकी मांग है सड़क निर्माण कराया जाए।














