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समाज कल्याण योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित, उपायुक्त ने समयबद्ध क्रियान्वयन पर दिया बल

 

IMG 20250629 WA0003 2सरायकेला : समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में समाज कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त सुश्री रीना हांसदा, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती सत्या ठाकुर, सहायक निदेशक (सामाजिक सुरक्षा) श्री अनिल टुडू, सभी सीडीपीओ, आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाएं सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में सर्वजन पेंशन योजना, मुख्यमंत्री मायावती सम्मान योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, विधवा पुनर्विवाह योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, पोषण आहार कार्यक्रम आदि योजनाओं की अद्यतन प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन हो: उपायुक्त

उपायुक्त ने बैठक में स्पष्ट किया कि जनता दरबार एवं अन्य माध्यमों से लगातार यह जानकारी मिल रही है कि कई लाभुकों की पेंशन कई महीनों से बाधित है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों की तकनीकी त्रुटियों को शीघ्र दूर कर पात्र लाभुकों को लाभान्वित किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि सर्वजन पेंशन योजना एवं किशोरी समृद्धि योजना के तहत नवचिह्नित पात्रों का त्वरित आवेदन लेकर उन्हें योजना से जोड़ा जाए।

पोषाहार की गुणवत्ता और बच्चों की उपस्थिति पर विशेष ज़ोर

पोषण आहार कार्यक्रम की समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित, गुणवत्तापूर्ण पोषाहार वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी सीडीपीओ और पर्यवेक्षिकाओं को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केंद्र सुचारू रूप से संचालित हो रहे हों, बच्चों की उपस्थिति बनी रहे और केंद्रों में बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो।

जर्जर भवनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

जिन आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति अत्यंत जर्जर है, वहां के बच्चों को वैकल्पिक भवनों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया। वहीं मरम्मत योग्य भवनों की सूची तैयार कर शीघ्र मरम्मत कार्य प्रारंभ करने पर भी बल दिया गया।

कुपोषित बच्चों की पहचान और उपचार जरूरी

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी CDPO और MOIC अपने-अपने क्षेत्रों में गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) एवं मध्यम रूप से कुपोषित (MAM) बच्चों की पहचान कर उन्हें MCC केंद्रों में भर्ती कराएं। उन्होंने कहा कि बेड ऑक्युपेंसी के अनुसार कार्ययोजना बनाकर संस्थागत पोषण सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

एकीकृत मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का निर्देश

बैठक के समापन पर उपायुक्त ने कहा कि सभी योजनाओं की सतत निगरानी हेतु एक एकीकृत मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए ताकि योजनाओं की वस्तुनिष्ठ समीक्षा समय-समय पर की जा सके।

“ये योजनाएं सीधे आमजन की गरिमा और जीवन से जुड़ी होती हैं, अतः इनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही अनिवार्य है, जिससे वास्तविक जरूरतमंदों तक समय पर लाभ पहुंच सके।”
— श्री नितिश कुमार सिंह, उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां

 

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