
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। बिल संशोधन में बड़ा खेल कई अभियंता रडार पर।।
13 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।
बस्ती ।। बिजली बिल संशोधन के नाम पर हुई लाखों रुपये की कथित लूट की जांच शुरू हो गई है। अधिकारी इसे बड़ा खेला बता रहे हैं। ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन) ने अब इसकी जांच शुरू कर दी है। बिलिंग एजेंसी के साथ ही वर्ष 2013 से 2021 तक जिले में तैनात रहे तत्कालीन अभियंता भी जांच एजेंसी के रडार पर हैं। बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर के विभिन्न वितरण खंड में तैनात अधिशासी अभियंताओं से जांच एजेंसी के अधिकारी बयान दर्ज करा चुके हैं। उस दौरान के अभिलेखों को तलब किया गया है। जांच शुरू होने के बाद से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
वर्ष 2013 से 2021 तक शिवा इंटरप्राइजेज ने बस्ती व गोरखपुर विद्युत वितरण जोन में स्पॉट बिलिंग का कार्य किया है। इसके बाद विभाग व फर्म के बीच विवाद हो गया और फर्म को काम से हटा दिया गया। विवाद के बाद मामला आला अधिकारियों तक पहुंचा। जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि नियम विरूद्ध तरीके से बिजली बिलों के संशोधन के नाम पर बिल को कम कराया गया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बिल संशोधन का खेल बिना अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। बस्ती और आसपास के जिलों में बिजली बिल संशोधन के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) की सक्रियता ने बिजली विभाग के गलियारों में खलबली मचा दी है।
इस मामले के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:—
1. जांच के दायरे में ‘बड़ा खेल’
जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि कैसे वर्ष 2013 से 2021 के बीच नियमों को ताक पर रखकर बिजली बिलों में भारी कटौती की गई। आरोप है कि शिवा इंटरप्राइजेज नामक बिलिंग एजेंसी और विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से राजस्व को लाखों-करोड़ों का चूना लगाया गया।
2. रडार पर तत्कालीन अभियंता
EOW ने उन सभी अधिशासी अभियंताओं (XEN) की सूची तैयार की है, जो 2013 से 2021 के बीच बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर में तैनात थे। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के कई अधिकारियों से इस संबंध में पूछताछ की जा चुकी है और उनके बयान दर्ज किए गए हैं।
3. फर्म और विभाग के बीच विवाद
स्पॉट बिलिंग का काम देखने वाली फर्म ‘शिवा इंटरप्राइजेज’ को विवाद के बाद हटा दिया गया था। जांच में पाया गया कि बिल संशोधन की प्रक्रिया में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। विभागीय जानकारों का मानना है कि बिना उच्चाधिकारियों के आईडी और पासवर्ड के इतने बड़े पैमाने पर बिल कम करना संभव नहीं था।
4. रिकॉर्ड्स तलब
जांच एजेंसी ने पिछले 8 सालों के महत्वपूर्ण दस्तावेज और लॉग बुक्स को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया है। ईओडब्ल्यू की टीम अब डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए यह देख रही है कि किस लॉगिन आईडी से सबसे ज्यादा बिल संशोधित किए गए।
👉 उपभोक्ता सहायता के लिए:—
यदि आप अपने बिजली बिल से संबंधित किसी वैध सुधार या शिकायत के लिए जानकारी चाहते हैं, तो आप UPPCL की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं या 1912 टोल-फ्री हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। इस घोटाले की जांच के बाद विभाग में बड़े स्तर पर कार्रवाई होने की संभावना है, जिससे भ्रष्टाचार में लिप्त कई सफेदपोश चेहरों से नकाब उतर सकता है।















