A2Z सभी खबर सभी जिले की

न्याय माँगना पड़ा महंगा: ओमकार हॉस्पिटल पर धमकाने और दबाव का आरोप

प्रशासन खामोश, अस्पताल बेखौफ—पीड़ित की फरियाद अनसुनी ? इलाज नहीं, इंसाफ चाहिए! ओमकार हॉस्पिटल मामले ने झकझोरा जिला

बलौदाबाजार।
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इलाज के नाम पर बेतहाशा वसूली और शिकायत करने वालों को डराने–धमकाने के आरोपों से घिरे ओमकार हॉस्पिटल का एक और चौंकाने वाला चेहरा सामने आया है। मामला तब और गंभीर हो गया जब मंत्री, कलेक्टर और प्रेस क्लब तक शिकायत पहुँचने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन कथित रूप से और अधिक आक्रामक हो गया।

ग्राम गिरौदपुरी, कसडोल निवासी राधेलाल पटेल ने ओमकार हॉस्पिटल पर मरीज को बंधक बनाकर भारी उगाही करने का आरोप लगाते हुए पहले कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा, कलेक्टर बलौदाबाजार और प्रेस क्लब अध्यक्ष से शिकायत की। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी तो मिल गई, लेकिन यहीं से पीड़ित की परेशानी और बढ़ गई।

पीड़ित का आरोप है कि शिकायत करने से नाराज़ होकर अस्पताल से जुड़े डॉ. वसीम रजा, ऋषि शुक्ला और आशीष शुक्ला ने खुलेआम धमकाना शुरू कर दिया।
10 दिसंबर 2025 की शाम प्रेस क्लब में हुई प्रेस वार्ता के बाद, जब राधेलाल पटेल मरीज को लेने दोबारा अस्पताल पहुँचा, तो काउंटर पर उससे डेढ़ लाख रुपये जमा करने की मांग कर दी गई। जब इलाज का पूरा बिल और विवरण मांगा गया, तो सिर्फ 10 हजार रुपये का कच्चा बिल दिखाया गया, बाकी रकम का कोई हिसाब नहीं दिया गया।

बिना समुचित इलाज इतनी बड़ी रकम देने से इनकार करने पर माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि रात करीब 8 बजे, मरीज को शिफ्ट करने आई एम्बुलेंस को रोक दिया गया। डॉ. वसीम रजा की मौजूदगी में ऋषि शुक्ला और आशीष शुक्ला ने पीड़ित और उसके परिजनों को डॉक्टर के केबिन में बुलाकर सवाल किया—
“मंत्री, कलेक्टर और प्रेस क्लब में शिकायत क्यों की? अब तुम्हें देख लेंगे।”

पीड़ित के अनुसार, बंद केबिन में उसे धमकाया गया कि “अब मरीज को लेकर बलौदाबाजार कैसे पार करोगे, यह भी देख लिया जाएगा।” इस दौरान बिना अनुमति कैमरा चालू कर जबरन वीडियो रिकॉर्ड किया गया और प्रेस क्लब के खिलाफ बयान देने का दबाव बनाया गया। डर और दबाव के उन पलों को पीड़ित ने अपने मोबाइल में लगभग 22 मिनट की ऑडियो रिकॉर्डिंग के रूप में सुरक्षित कर लिया, जो अब सामने आ चुकी है।

इतना ही नहीं, आरोप है कि पुराने वीडियो को कथित रूप से तोड़-मरोड़ कर सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है, ताकि शिकायतकर्ता और प्रेस क्लब को बदनाम कर उनकी आवाज़ दबाई जा सके।

पीड़ित का कहना है कि ओमकार हॉस्पिटल में इलाज नहीं, बल्कि डर और उगाही का तंत्र चल रहा है। जो भी इसके खिलाफ बोलने की हिम्मत करता है, उसे धमकाकर चुप कराने की कोशिश होती है। हैरानी की बात यह है कि मंत्री, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तक शिकायत पहुँचने के बावजूद अब तक न तो आरोपियों पर अपराध दर्ज हुआ है और न ही धमकी देने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है।

यह पूरा घटनाक्रम न सिर्फ जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल है।
क्या शिकायत करना अब अपराध बन गया है?
क्या निजी अस्पताल कानून से ऊपर हो गए हैं?

न्याय की आस में पीड़ित आज भी शासन–प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस गंभीर मामले में सख्त कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी काग़ज़ों में दबकर रह जाएगा।

Back to top button
error: Content is protected !!