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धनबाद कोयला घोटाला ED का समन और हाई कोर्ट की डेडलाइन

बड़े कारोबारियों पर ED का शिकंजा (आज की अपडेट)

आज, 25 फरवरी 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धनबाद के रसूखदार कोयला कारोबारी एल.बी. सिंह (L.B. Singh) को पूछताछ के लिए समन भेजा है।

आरोप: एल.बी. सिंह की कंपनी ‘देव-प्रभा’ और उनके सहयोगियों पर अवैध कोयला व्यापार के जरिए करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

सिंडिकेट: ED की जांच में अमर मंडल, अनिल गोयल, मनोज अग्रवाल और संजय खेमका जैसे नामों की संलिप्तता भी सामने आई है। इनके ठिकानों से पहले ही 14 करोड़ से अधिक की नकदी और गहने जब्त किए जा चुके हैं।

कल हाई कोर्ट में ‘अग्निपरीक्षा’ झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने 26 फरवरी 2026 (कल) तक धनबाद के जिला खनन पदाधिकारी (DMO) को व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट का सवाल: “जिले में अवैध माइनिंग रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?”

सख्ती: कोर्ट इस बात से नाराज है कि प्रशासन केवल छोटे-मोटे छापों की रिपोर्ट देता है, जबकि “मुहाना” अवैध खदान बनाकर बड़े पैमाने पर चोरी जारी है।

स्थानीय थानों की भूमिका। लोदना ओपी और तिसरा ओपी एवं झरिया थाना घनवटी ओपी अंडर रडार। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, तीसरा। लोदना ओपी और तिसरा ओपी एवं झरिया थाना घनवटी ओपी

क्षेत्रों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं:

दिखावे की कार्रवाई: 23 फरवरी को गोल्डेन पहाड़ी में अवैध खदानों की भराई (Dozering) की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और CISF के जाते ही माफिया फिर से सक्रिय हो जाते हैं।

पुलिस-माफिया गठजोड़: विपक्ष (बाबूलाल मरांडी व अन्य) ने आरोप लगाया है कि स्थानीय थानों के प्रभारी और जिला प्रशासन के कुछ अधिकारी “प्रति टन” के हिसाब से कमीशन ले रहे हैं, जिससे तस्करी नहीं रुक रही है।

निरसा और झरिया की स्थिति: मौत का तांडव

निरसा: राजा कोलियरी (ECL) और मुग्मा क्षेत्रों में अवैध उत्खनन के दौरान लगातार चाल धंसने की घटनाएं हो रही हैं। माफिया डरा-धमकाकर मृतकों के शवों का आनन-फानन में अंतिम संस्कार करवा दे रहे हैं ताकि कानूनी पचड़े से बचा जा सके।

परिवहन: रात के 11 बजे के बाद धनबाद की सड़कों पर “जीरो” (बिना कागजात के कोयला लदे ट्रक) और सैकड़ों की संख्या में बाइक से बंगाल की ओर कोयला भेजा जा रहा है।

रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जिम्मेदारी की सुई सीधे तौर पर स्थानीय थाना प्रभारियों, धनबाद एसएसपी और राज्य सरकार की ओर मुड़ती है। जब तक थाना स्तर पर ‘लाइन’ (कमीशन का रास्ता) बंद नहीं होगी, तब तक कोयले की यह काली कमाई थमती नहीं दिख रही है।

विशेष नोट: कल (26 फरवरी) हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई धनबाद के कई बड़े अधिकारियों और थानेदारों का भविष्य तय कर सकती है।

स्थानीय ग्रामीणों ने हाई कोर्ट से अपील किया है थाना प्रभारी लोगों को 18 बैच का निलंबित कर देना चाहिए इन लोग थाना प्रभारी गिरी करने नहीं आए हैं कोयला चोरी करवाने आए हैं

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