हरियाणा

कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ का रिपोर्ट कार्ड – लोकतंत्र से विश्वासघात की दास्तां- जवाहर सिंह सौरोत पूर्व जिला अध्यक्ष बीजेपी पलवल

आज जब कांग्रेस चुनाव हारती है तो वे कभी ईवीएम (EVM) को दोष देते हैं तो कभी चुनाव आयोग को। लेकिन सच यह है कि पार्टी का नेतृत्व आज परिवारवाद की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है।पलवल की जनता और हमारे भाजपा कार्यकर्ता इस सच्चाई को घर-घर तक पहुँचाएंगे।

प्रवीण कुमार वन्दे भारत न्यूज़ :पलवल (22दिसंबर2025)कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ का रिपोर्ट कार्ड – लोकतंत्र से विश्वासघात की दास्तां- जवाहर सिंह सौरोत ( पूर्व जिला अध्यक्ष भाजपा – पलवल)भारतीय राजनीति के इतिहास में कांग्रेस पार्टी का नाम अक्सर लोकतंत्र की दुहाई देने के लिए लिया जाता है। लेकिन यदि गहराई से विश्लेषण किया जाए तो कांग्रेस का पूरा सफर वोट चोरी और जनादेश के अपमान की नींव पर टिका है। एक जिम्मेदार भाजपा नेता होने के नाते मेरा यह कर्तव्य है कि मैं जनता के सामने उन तथ्यों को रखूँ जिन्हें दशकों तक दबाया गया।कांग्रेस की वोट चोरी के तीन मुख्य स्तंभ हैं जो इनके असली चेहरे को उजागर करते हैं। पहला संगठनात्मक वोट चोरी जब पटेल का हक छीनकर नेहरू को दी गई सत्ता। कांग्रेस के भीतर वोट चोरी की परंपरा आजादी के पहले दिन से ही शुरू हो गई थी। 1946 में जब आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री के चयन के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन किया गया। तत्कालीन 15 प्रांतीय कांग्रेस समितियों में से 12 ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के पक्ष में मतदान किया था और शेष 3 समितियों ने किसी का नाम नहीं दिया। पंडित जवाहरलाल नेहरू को एक भी समिति का समर्थन प्राप्त नहीं था। फिर भी सत्ता के मोह और व्यक्तिगत रसूख का उपयोग कर जनादेश को पलटा गया। यह भारतीय लोकतंत्र की पहली और सबसे बड़ी वोट चोरी थी। जिसने देश की दिशा ही बदल दी।   कांग्रेस की दूसरी बड़ी चोरी चुनावी अनैतिकता और तानाशाही की पराकाष्ठा थी। 1971 के रायबरेली चुनाव में श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारी मतों से जीत हासिल की लेकिन यह जीत ईमानदारी की नहीं थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इंदिरा गांधी को सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और चुनावी भ्रष्टाचार का दोषी पाया। उनका चुनाव रद्द कर दिया गया। हार स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस ने संविधान में संशोधन कर यह कानून बनाने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री के चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती।  जब कानून ने साथ नहीं दिया तो 25 जून 1975 को पूरे देश को जेलखाना बना दिया गया। लाखों लोगों को बिना जुर्म के सलाखों के पीछे डाल दिया गया। यह वोट चोरी को छिपाने के लिए किया गया लोकतंत्र का चीरहरण था।    तीसरे प्रकार की वोट चोरी आधुनिक भारत की सबसे बड़ी चिंता है—अयोग्य व्यक्तियों का मतदाता बनना। कागजों और कानूनी बहसों में यह बार-बार सामने आया है कि सोनिया गांधी के नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही उनके नाम को मतदाता सूची में दर्ज कराया गया।  आरोप है कि एक बार नहीं, बल्कि दो बार फर्जी तरीके से मतदाता बनने की कोशिश की गई। यदि देश का सर्वोच्च नेतृत्व ही नियमों को ताक पर रखकर मतदाता बनेगा, तो यह 140 करोड़ भारतीयों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।  आज जब कांग्रेस चुनाव हारती है तो वे कभी ईवीएम (EVM) को दोष देते हैं तो कभी चुनाव आयोग को। लेकिन सच यह है कि पार्टी का नेतृत्व आज परिवारवाद की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है। कांग्रेस का जमीनी कार्यकर्ता आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। वह देख रहा है कि कैसे नेतृत्व की गलतियों की सजा संगठन को भुगतनी पड़ रही है। अब जनता जागरूक है। वह समझ चुकी है कि वोट चोरी करने वाले लोग देश का भला नहीं कर सकते।   पलवल की जनता और हमारे भाजपा कार्यकर्ता इस सच्चाई को घर-घर तक पहुँचाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आज हर वोट की कीमत है और हर गरीब का हक सुरक्षित है। हम कांग्रेस की इस वोट चोरी की मानसिकता को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबध्य है IMG 20251221 WA0068

[yop_poll id="10"]
Show More
Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!