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।। बस्ती में ‘मसाज’ की आड़ में जिस्मों की मंडी: कोतवाल की ‘चुप्पी’ पर सुलगते सवाल।।

सिस्टम को खुला चैलेंज: मैनेजर विक्की चौहान बोला- 'कोई डर नहीं', क्या पुलिस की शह पर चल रहा है धंधा?

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती में ‘मसाज’ की आड़ में ‘मजबूरी’ का सौदा, क्या खाकी की खामोशी में ही कोई राज़ है?

वृहस्पतिवार 22 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। कहने को तो यह ‘सभ्य’ समाज है, लेकिन शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के बीचों-बीच जो खेल चल रहा है, उसने नैतिकता को सरेआम नीलाम कर दिया है। सत्येंद्र गेस्ट हाउस के पास स्थित ‘द हेवन ग्लो स्पा’ आज कल चर्चा में नहीं, बल्कि विवादों और बदनामी के केंद्र में है। यहाँ मसाज के नाम पर जो “गंदा खेल” खेला जा रहा है, वह न केवल कानून की नाक के नीचे है, बल्कि सिस्टम की मिलीभगत की ओर भी इशारा कर रहा है।

💫मैनेजर विक्की चौहान का बेखौफ अंदाज: “डर कैसा?”

स्पा का मैनेजर विक्की चौहान जिस बेबाकी से ग्राहकों को ‘सेवाओं’ का रेट कार्ड और नेपाल से आई लड़कियों का हवाला देता है, वह हैरान करने वाला है। दिन भर स्पा के बंद कमरों में देह व्यापार का बाजार सजता है और रात होते ही इन ‘सेवाओं’ को शहर के नामी होटलों तक सप्लाई किया जाता है। सवाल यह है कि आखिर इस मैनेजर के पास वो कौन सा ‘सुरक्षा कवच’ है, जो इसे पुलिस और कानून के खौफ से कोसों दूर रखता है?

💫कोतवाल की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी: सवाल तो उठेंगे!

शहर के सबसे व्यस्त इलाके में इतना बड़ा सेक्स रैकेट फल-फूल रहा है, लेकिन स्थानीय कोतवाली पुलिस को इसकी भनक तक नहीं? या फिर भनक होने के बावजूद आँखों पर पट्टी बाँध ली गई है? जनता पूछ रही है कि शहर कोतवाल की यह संदिग्ध चुप्पी क्या किसी ‘नजराने’ का नतीजा है या फिर कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही? जब शहर के बीचों-बीच जिस्मफरोशी का धंधा ‘होम डिलीवरी’ मोड पर आ जाए, तो कानून-व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।

💫DIG संजीव त्यागी का कड़ा रुख: अब ‘एक्शन’ की बारी

मामला गर्म होने के बाद DIG बस्ती, संजीव त्यागी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि स्पा की आड़ में अनैतिक देह व्यापार चलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। DIG के कड़े तेवर ने विभाग के भीतर और बाहर खलबली मचा दी है। लेकिन बड़ा सवाल अभी भी खड़ा है—क्या यह कार्रवाई सिर्फ छोटी मछलियों तक सीमित रहेगी, या उन सफेदपोशों और रसूखदारों के गिरेबान तक भी पहुँचेगी जो इस काले धंधे के असली संरक्षक हैं?

💫 दिखावा या सुधार?

बस्ती की जनता अब केवल ‘आश्वासन’ नहीं, बल्कि ‘परिणाम’ चाहती है। क्या ‘द हेवन ग्लो स्पा’ जैसे कलंक को शहर से मिटाया जाएगा? क्या उन पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी जिन्होंने अपनी नाक के नीचे इस गंदगी को पनपने दिया? जन एक्सप्रेस और बस्ती की जनता की नजरें अब सीधे प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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