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सहारनपुर एनकाउंटर या ‘हाफ एनकाउंटर’? 19 नवंबर 2025 को गोली लगने वाला शहजाद ही अब बना आरोपों की धुरी — देवबंद जेल में जज के सामने यूपी पुलिस पर सनसनीखेज खुलासा!

सहारनपुर पुलिस का ‘हाफ एनकाउंटर’! देवबंद जेल में बंदियों का सनसनीखेज खुलासा — जज की मौजूदगी में चौंकाने वाले आरोप

🚨📰 सहारनपुर पुलिस का ‘हाफ एनकाउंटर’! देवबंद जेल में बंदियों का सनसनीखेज खुलासा — जज की मौजूदगी में चौंकाने वाले आरोप 📰🚨

🚨📰 एनकाउंटर या ‘हाफ एनकाउंटर’? 19 नवंबर 2025 को गोली लगने वाला शहजाद ही अब बना आरोपों की धुरी — देवबंद जेल में जज के सामने यूपी पुलिस पर सनसनीखेज खुलासा! 📰🚨

सहारनपुर | उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। जनपद सहारनपुर में 19 नवंबर 2025 को पुलिस एनकाउंटर में पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया शहजाद अब उसी घटना को लेकर “हाफ एनकाउंटर” का आरोप लगा रहा है। मामला उस समय और गंभीर हो गया जब यह आरोप किसी सड़क या प्रेस वार्ता में नहीं, बल्कि देवबंद जेल के भीतर न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी में लगाए गए।

जानकारी के अनुसार, 19 नवंबर 2025 को सहारनपुर पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान शहजाद को गोली लगने का दावा करते हुए उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार किया था। पुलिस का उस वक्त कहना था कि बदमाश ने फायरिंग की, जिसके जवाब में की गई कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। लेकिन अब वही शहजाद जेल में जज के सामने खड़ा होकर उस एनकाउंटर की कहानी को झूठा बताते हुए पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि जज परविन्दर सिंह शिकायतों की जांच के लिए देवबंद जेल पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ बंदियों के साथ शहजाद ने भी बयान दिया। आरोप है कि बंदियों ने न्यायाधीश के सामने कहा कि पुलिस ने उन्हें जमीन पर लिटाकर गोली मारी और बाद में इसे मुठभेड़ का नाम दे दिया गया। बंदियों का दावा है कि यह एक सोची-समझी “हाफ एनकाउंटर” की कार्रवाई थी।

यह खुलासा सामने आने के बाद पूरे जनपद में हड़कंप मच गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या 19 नवंबर 2025 की पुलिस कार्रवाई पूरी तरह नियमों और कानून के दायरे में थी, या फिर जेल में दिए गए बयान किसी बड़ी सच्चाई की ओर इशारा कर रहे हैं? चूंकि यह बयान सीधे न्यायिक अधिकारी के समक्ष दर्ज हुए हैं, इसलिए मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ गई है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि जांच में बंदी शहजाद और अन्य कैदियों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ सहारनपुर पुलिस बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक बड़ा झटका होगा। वहीं अगर आरोप निराधार साबित होते हैं, तो यह पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास भी माना जाएगा।

फिलहाल प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर तथ्यों की गहन पड़ताल की चर्चा है। मानवाधिकार और कानून-व्यवस्था के नजरिए से यह मामला बेहद संवेदनशील बन चुका है। देवबंद जेल में जज की मौजूदगी में लगाए गए आरोपों ने इसे सामान्य शिकायत से कहीं आगे पहुंचा दिया है।

जनता और सोशल मीडिया पर भी अब यही सवाल गूंज रहा है—
क्या यह वाकई एक नियमित एनकाउंटर था, या फिर ‘हाफ एनकाउंटर’ की वह सच्चाई सामने आ रही है, जिसे अब तक दबाया जाता रहा?

अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं। सच सामने आएगा तो तय है कि इसके असर दूर तक जाएंगे।


✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़

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