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सबसे बड़ा गांव, सबसे बड़ी परेशानी; अस्पताल खुद ‘आईसीयू’ में… स्वास्थ्य सुविधाओं पर नेताओं की चुप्पी, बरमंडल की जनता परेशान….

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जिला ब्योरों गोपाल मारु की रिपोर्ट।
सरदारपुर । अस्पताल में स्टाफ का अकाल रोस्टर में डॉक्टर, अस्पताल में इंतजार; आखिर कब सुधरेगी स्वास्थय सेवाएं  सरदारपुर तहसील का सबसे बड़ा गांव कहलाने वाला आज स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में गंभीर उपेक्षा का शिकार दिखाई दे रहा है। एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर बरमंडल का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उन दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रहा है। लगभग 30 से 40 गांवों की आबादी जिस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है, वहां चार डाक्टरों के पदस्थ होने के बाद भी लोगों को झोलाछाप छाप डाक्टरों से इलाज करवाना पड़ रहा है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में  डाक्टर समय पर मिलते ही नहीं और बीमारी कभी समय देखकर नहीं आती है ऐसे में अगर बीमार व्यक्ति सरकारी अस्पतालों की और रुख करता है तो वहां पर भी अगर समय पर डाक्टर उपस्थित नहीं हो तो स्वाभाविक है कि गांव में अन्य झोलाछाप डॉक्टरों से प्राथमिक उपचार लेना ही उसकी मजबूरी बन जाती है ऐसा ही मंगलवार को बरमंडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर देखने को मिला यहां पुर्व से तीन डाक्टर पदस्थ हैं और एक की और नियुक्त विगत दिनों हुई। कुल चार डाक्टर यहां पदस्थ होने के बाद भी समय पर एक भी डाक्टर उपस्थित नहीं होना कही ना कही स्वास्थ्य विभाग के जवाबदार अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है।विगत दिनों टांडा में हुई घटना के बाद भी विभागीय अधिकारी इस और ध्यान देने को तैयार ही नहीं है गांव गांव में झोलाछाप डॉक्टर पांव पसार रहे हैं और विभागीय अधिकारी शायद टांडा जैसी किसी घटना का इंतजार कर रहा है घटना के बाद दिखावे की कार्रवाई कर विभाग इतीश्री कर लेते हैं। कोई डाक्टर आनलाइन सेंटर की आड़ में मरीजों का इलाज कर रहा है तो कोई गांव गांव में क्लिनिक खोलकर घर घर जाकर इलाज कर रहा है। सरकारी अस्पतालों से लोगों का विश्वास ही उठता जा रहा है क्योंकि यहां ना तो समय पर डाक्टर उपस्थित रहते हैं और ना ही दवाई गोली मज़बूरी गरीब मजदूरों को अन्य झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज करवाने को मजबूर होना पड़ता है।
 इतने बड़े क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं आखिर किस भरोसे संचालित की जा रही हैं। इसका तो भगवान ही मालिक है
झोलाछाप डॉक्टरों पर मेहरबान है जवाबदार अधिकारी क्षेत्र में गांव गांव में झोलाछाप डॉक्टर धड़ल्ले से बीना डिग्री के इलाज कर रहे हैं जब कोई घटना होती है तब जाकर थोड़ी बहुत दिखावे की कार्रवाई कर इतीश्री कर ली जाती है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। सामान्य बीमारी से लेकर प्रसूति सेवाओं और आपातकालीन परिस्थितियों तक लोगों की पहली उम्मीद यही अस्पताल होता है। लेकिन जब अस्पताल पहुंचने पर आवश्यक स्टाफ उपलब्ध नहीं मिलता, तो मरीजों और उनके परिजनों को मजबूरी में सरदारपुर, राजगढ़ या जिला अस्पताल धार का रुख करना पड़ता है।सबसे गंभीर विषय चिकित्सकों की उऊ को लेकर सामने आ रहा है। प्राप्त ड्यूटी रोस्टर के अनुसार अस्पताल में आपातकालीन एवं प्रसव सेवाओं के लिए चिकित्सकों की ड्यूटी निर्धारित है।लेकिन ग्रामीणों में लंबे समय से चर्चा है कि वे अस्पताल में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते। बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद भी कई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अन्य अस्पतालों के भरोसे छोड़ दिया जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग कागजों में व्यवस्थाओं को बेहतर बताता है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग हैं। अस्पताल भवन है, योजनाएं हैं, रोस्टर है, लेकिन जब मरीज को समय पर डॉक्टर, दवा और उपचार नहीं मिलता, तो सारी व्यवस्थाएं केवल कागजी साबित होती हैं।
दोनों दलों के नेता आखिर मौन क्यों अस्पताल की बदहाली लेकर अब सवाल केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रह गया है। क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। चुनाव के दौरान गांव-गांव जाकर विकास के वादे करने वाले नेता स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा के लिए आखिर आगे क्यों नहीं आते?
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि यही स्थिति किसी बड़े शहर या राजनीतिक रूप से प्रभावशाली क्षेत्र में होती, तो अब तक अधिकारियों की बैठकें हो चुकी होतीं और व्यवस्थाओं में सुधार भी दिखाई देता। लेकिन बरमंडल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य समस्याएं शायद किसी की प्राथमिकता नहीं बन पा रही हैं।
जनता पूछ रही है जवाब…
ड्यूटी रोस्टर में नाम होने के बावजूद डॉक्टर नियमित रूप से अस्पताल में क्यों नहीं मिलते।
इनका कहना है…….
आज मैं अवकाश पर हुं।किस कारण से स्टाप नहीं आया है मैं पता लगाती हूं।
मोनिका पटेल।……
मेडिकल आफिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरमंडल
मैं बात करती हूं कि ड्युटी पर चारों डाक्टर क्यों नहीं आए।
शीला मुजाल्दा …..
ब्लाक मेडिकल आफिसर सरदारपुर।
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