
।। छत्तीसगढ, मंगलवार 11 अगस्त 2026 ।।
वंदेभारतलाइवटीव न्युज–:: प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार अब अपने देश में पढ़ने वाले स्कूली बच्चे छत्तीसगढ प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और महान साहित्यकारों और छत्तीसगढ की अनोखी लोक संस्कृति के बारे में अध्ययन करेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के द्वारा तैयार की जा रही कक्षा पांचवी और आठवीं की नई पुस्तकों विशेषकर सामाजिक विज्ञान में छग. राज्य से संबंधित सामग्री को प्रमुखता के साथ शामिल किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नए पाठ्यक्रम में छायावाद के जनक पंडित मुकुटधर पाण्डेय, और हिंदी पत्रकारिता के विद्वान पुरुष पंडित माधवराव सप्रे जी की जीवनी को भी शामिल किया गया है।.जानकारी अनुसार शिक्षकों के लिए भी एनसीआरटी ने एक अच्छा कदम उठाया है। सामाजिक विज्ञान में इसके पहले 22पाठ रहते थे, जिन्हें कि अब कम करते हुए 12 पाठों तक कर दिया गया है। पाठ्यक्रमों में हो रहे बदलकर बदलाव-:: गंगाराम मगरमच्छ: इंसान और बेजुबान की अनूठी मिसाल: जिसमें बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव के प्रसिद्ध मगरमच्छ गंगाराम की कहानी को कक्षा पांचवीं के छात्र पढ़ेंगे।. ” जो जीता वही सिकंदर ‘ के स्थान पर ” जो जीता वही बाजीराव: , पाठ के नाम से जाना जायेगा। मालूम हो कि पेशवा बाजीराव ने अपने जीवन के 40 वर्ष के जीवनकाल में 40 युद्ध लड़े और यह.युद्ध जीते भी थे। ” महापुरुषों को भी मिला पाठ्यक्रम में प्रमुख स्थान-: पंडित मुकुटधर पाण्डेय जी की जीवनी को कक्षा आठवीं के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, माधवराव सप्रे का पाठ कक्षा छठवीं के पाठ्यक्रम के स्थान पर कक्षा आठवीं मे शामिल किया गया है। और इसके साथ ही राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय भाषा, राष्ट्रीय चिन्हों आदि से जुड़े हुए अध्यायों को जो कि पिछले कुछ सालों से उपेक्षित रहें है, इन अध्यायों को एकबार फिर से प्रमुखता के साथ शामिल किया गया है। देश के करीब करीब 28,000 सीबीएसई संबद्ध विद्यालयों में एनसीआरटी का पाठ्यक्रम प्रमुखता से लागू होता है। देश के करीब 19 से भी अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने राज्य बोर्डों जैसे कि हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में एनसीआरटी की पुसतकें आंशिक रूप से या पूरी तरह से हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम से इन्हें अपनाया हुआ है। देश के करीब सभी राज्यों में केंद्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों मे यही पुस्तकें पढ़ाई भी जाती हैं, इसका सीधा मतलब है कि छत्तीसगढ राज्य की गौरव गाथाएं अब से पूरे देश भर के करोड़ों स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम का यह हिस्सा बन जायेंगी।





