
*शासकीय शिक्षक दिवाकर तिवारी के विरुद्ध शासन प्रशासन कार्रवाई करने से क्यों हिचकिचा रहा है ? कब तक आदिवासी परिवार को न्याय के लिए इंतजार करना पड़ेगा…*
शहडोल/जयसिंहनगर – ग्राम अमझोर में पीड़ित आदिवासी परिवार विगत 7 वर्षों से शासन प्रशासन के भ्रष्ट तंत्र से अपने आप को बचा नहीं पा रहा है, आदिवासी परिवार की लड़ाई लगभग 40 वर्ष पूर्व से चला रहा है , समान वर्ग चंद लोग न्याय और संविधान से अपने आप को ऊपर समझते हैं।
क्या है मामला….
तहसील जयसिंहनगर के गांव अमझोर में शासकीय शिक्षक दिवाकर तिवारी द्वारा आदिवासी के पट्टे दखल की आराजी पर अवैध का मकान का निर्माण वर्ष 2019 से प्रारंभ करता है न्यायालय से स्थगन आदेश जारी होने के बाद भी अवैध मकान का निर्माण जारी रहा हल्का पटवारी श्रुति तिवारी ने दिवाकर तिवारी के साथ पक्षपात पूर्ण कार्यवाही करते हुए आदिवासी के पट्टे कब्जे दखल की आराजी को मध्य प्रदेश शासन की भूमि पर कब्जा बात कर ₹ 10,000/- का जुर्माना कराकर संरक्षण प्रदान करने की कोशिश की , इधर दिवाकर तिवारी ने भी आनन फानन ने शासकीय भूमि पर कब्जा स्वीकार करते हुए ₹ 10,000/- अर्थदंड जमा कर रसीद न्यायालय से प्राप्त कर ली।
शासन प्रशासन क्यों है मौन….
आदिवासी परिवार “कंवर” जनजाति से संबंध रखता है स्व लल्ला सिंह के दिवाकर तिवारी के पुरखों की दास्ता को स्वीकार नहीं किया।
सन 1982-83 से लगातार तिवारी परिवार के सदस्यों के द्वारा शारीरिक व मानसिक शोषण आदिवासी परिवार के ऊपर करता आ रहा है, लल्ला सिंह लगभग 4 एकड़ के पट्टेदार हैं, पारिवारिक झगड़े में लल्ला सिंह को गंभीर आरोपों में तिवारी परिवार ने जेल भेजने में कोई कमी नहीं की इस शर्मिंदगी के कारण लल्ला सिंह अपने घर परिवार व समाज में प्रतिष्ठा पर काफी बड़ा कुठाराघात सहन करना पड़ा।
लल्ला सिंह ने शासन प्रशासन को उनके खिलाफ बहुत सी करवाई की परंतु कोई प्रभाव नहीं पड़ा विवादित आरजी पर लल्ला सिंह की बनी झोपड़ी में आग लगा दी गई, जिसकी शिकायत कलेक्टर महोदय शहडोल को की गई थी।
विवादित आराजी पर कई पेड़ काट दिए गए और महुआ की कई पेड़ों को हड़प लिया गया।
कहते हैं ना इतिहास पुनः दोहराता है, वर्ष 2019 में इसी तिवारी परिवार का काला अध्याय पुनः प्रारंभ होता है ,चेहरे बदल गए पर शोषण का तरीका वही था , शासन के आलाधिकारी आदिवासी के पट्टे की भूमि की पैमाईश आज तक नहीं कर पाए ,तब भी शासन प्रशासन मौन ही था।
इस तरह का शोषण कब तक जारी रहेगा यह देखना अभी बाकी है।
वरिष्ठ न्यायालय के आदेशों की उड़ रही धज्जियां…
शासकीय शिक्षक दिवाकर तिवारी ने वरिष्ठ/ कनिष्ठ न्यायालय के आदेशों कि अवहेलना लगातार कर रहा है। न्यायालय अपर कलेक्टर के आदेश को नायब तहसीलदार दर किनार कर दिया लल्ला सिंह के पुत्र ओंकार सिंह ने माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में रिट पिटीशन क्रमांक 16603 / 2024 में पारित आदेश दिनांक 15.7.2025 के परिपालन 90 दिवस में कार्यवाही कर न्यायालय को अवगत कराना था। कलेक्टर शहडोल द्वारा 150 दिवस के बाद कार्रवाई नायब तहसीलदार जैसीनगर के पाले में फेंक कलेक्टर शहडोल ने अपना हाथ साफ कर लिया।
तहसीलदार जैसीनगर 7 दिवस की कार्रवाई को 8 माह समझने में लगा दिए जिससे प्रतीत होता है कि आदिवासी के मामले में शासन प्रशासन कितना मुस्तैद रहता है कहना चाहिए कि शासन प्रशासन एक दूसरे को टोपी पहनने में लगे हुए हैं,कहीं कुछ नहीं होने वाला।
आवेदक ओंकार सिंह चाहता क्या है….
आवेदक के चार एकड़ भूमि की पैमाइश कर कब्जा वापस दिला दिया जाए।
बड़े काश्तकारों की भूमि का सीमांकन विधि सम्मत तरीके से कराई जाए।
जब तक सीमांकन व बेदखली की कार्रवाई पूर्ण ना हो जाए तब तक दिवाकर तिवारी को उसके पद से पृथक कर दिया जाए।
शासन प्रशासन की कार्यवाही पर संदेह क्यों…
विगत 7 वर्षों में जो कुछ भी हुआ वह सत्ताधारी पार्टी के चंद लोगों के इशारे पर हुआ शासन प्रशासन उस आदिवासी को न्याय दिलाने के हित में कभी भी खड़ा नहीं था, कहने को तो आदिवासियों के हितों में बहुत से नियम कानून बने हैं पर वह सब किताबों तक ही सीमित है वास्तविक धरातल में आदिवासी का हित कहीं दिखाई नहीं देता।
शासन प्रशासन पर भरोसा करना सिर्फ एक दिखावा साबित हो रहा है क्या ओंकार सिंह को भी न्याय उसके हित में मिलेगा ?



