
कारीसाथ , जहानागंज , आजमगढ़
भारतीय नारी धर्म के प्रति इतना अटूट विश्वास रखने वाली होती है कि उनके प्रति वह सब कुछ समर्पित कर आस्था के इस पड़ाव पर पहुंचकर पुत्रों की समृद्धि के लिए या पुत्र प्राप्ति के लिए सबसे बड़ा और कठिन व्रत कर सकती हैं।उस व्रत को पालन करने में जरा भी संकोच नहीं करती कि यह व्रत कितनी कठिन परीक्षा की घड़ी हो जाता है की तीन दिन तक महिलाए जीवित्पुत्रिका व्रत में लीन होकर बिना जल ग्रहण किए धैर्य के साथ इस पर्व को तो मनाती है।इतना ही नहीं यह विदेशो में भी खूब प्रचलित है।इस व्रत में उपवास रखने वाली महिलाएं बिना कुछ खाए पिए कठिन परीक्षा देने में भी पीछे नहीं हटती हैं।पुत्र के सुख,स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए व्रती महिलाओं ने कारीसाथ के पोखरे पर गोठ बनाकर कथा सुनी। व्रती महिलाओं ने बुधवार को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा।दिन भर निर्जला व्रत रहते हुए शाम को व्रत का पूजन किया।पुत्र विहीन रही महिलाओं ने पुत्र प्राप्ति के लिए मनौती मांगी।जिन महिलाओं की मनौती पूरी हो चुकी थी वह गाजे बाजे के साथ जीवित्पुत्रिका व्रत का संकल्प पूरा किया व्रती महिलाओं ने घरों में ही सुंदर पूजा मंडप बनाया पूजा मंडप में हल्दी और आटे का एपन से गोठ बना कर इसके चारों तरफ व्रती महिलाए बैठ गई कहीं वैदिक ब्राह्मण तो कहीं बुजुर्ग महिलाओं ने व्रत की कथा सुनाई अधिकांश महिलाओं ने कारीसाथ पोखरे पर ही गोठ बनाकर इसके चारों तरफ बैठकर व्रत की कथा सुनी और सुनाई। अंत मे सभी व्रती महिलाओं ने संतान की दीर्घायु व आरोग्य के लिए देवी मां से प्रार्थना की। कल सुबह व्रत का पारण करेंगी । इस अवसर पर गांव के निकेश , डब्बू , संतोष सहित सैकड़ों बच्चों ने व्रती महिलाओं का सहयोग करते रहे ।
















