

तालाबों के अस्तित्व पर संकट मतलब भविष्य का अंधकारमय होना अतः स्वयं जागृत होकर लोगों को जगायें – समाजसेवी सुमित शुक्ला
आज दिन बुधवार को विकासखण्ड महुआ के सहेवा गांव के युवाओं ने समाजसेवी सुमित शुक्ला की अगुवाई में मारताला नामक तालाब की साफ सफाई की व लोगों के बीच स्वच्छता का संदेश दिया।आपको बताते चलें कि सहेवा गांव में लगातार दो वर्षों से समाजसेवी सुमित शुक्ला गांव के युवाओं को एकत्रित कर किसी ना किसी तालाब में सफाई अभियान चलाकर लोगों के स्वच्छता का संदेश व तालाबों के अस्तित्व को बचाने का प्रयास कर रहे हैं अगर देखा जाए तो आज के समय में तालाबों की हालत बद से बद्तर स्थिति में है तथा इसके जिम्मेदार नजदीक निवास करने वाले लोग हैं और उनसे कहीं ज्यादा जिम्मेदार एसी कमरे में बैठे अधिकारी गण है जो शासन को गलत रिपोर्ट भेजकर प्रतिवर्ष तालाबों के अस्तित्व को समाप्त करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।जिन तालाबों का पानी कभी पीने व भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था आज उसी पानी को छूने से डर लगता है।तालाब किनारे शौच जाना कूड़ा कर्कट फेंकना आम बात है यहां तक की बस्ती से जुड़े तालाबों में लोग टैंक का पाइप तक पानी में डाल रहे हैं जिससे पानी विषैला और अनगिनत बिमारियों का जन्मदाता बन कर रह गया है समाजसेवी सुमित शुक्ला ने बताया कि हमारे पूर्वजों ने पूर्व में अपना सब कुछ न्यौछावर कर इस उम्मीद से तालाबों का सृजन कराया ताकि कोई प्यास से ना तड़पें आज भी गांव के वृद्ध तालाब की पूजा करते हुए सागर की उपाधि देते हैं फिर तालाबों में गंदगी क्यों? समाजसेवी सुमित शुक्ला ने कहा कि अगर शासन ईमानदारी से ग्राम प्रधान सचिव समाजसेवी व थाना प्रभारी को मिलाकर एक प्रत्येक ग्राम पंचायत में कमेटी का गठन करे जो मिलकर लोगों को तालाबों के प्रति जागरूक व गंदगी करने वालों पर कार्रवाई करावें तो हों सकता है कि तालाबों का अस्तित्व बच सकें।इस दौरान समाजसेवी सुमित शुक्ला पंकज प्रजापति सुमित प्रजापति सत्यम शुक्ला अर्जुन अनुरागी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे















