
अंबेडकर नगर
सर्दी में बच्चों में श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कोल्ड कफ, फ्लू, ब्रोंकियोलाइटिस और निमोनिया जैसी बीमारियों ने बच्चों को चपेट में लेना शुरू कर दिया है।
मंगलवार को जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में 60 बच्चे पहुंचे, जिसमें से 35 सांस से संबंधी बीमारी से पीड़ित थे। डाक्टर ने बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे ब्रोंकियोलाइटिस की जद में ज्यादा आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश रस्तोगी ने बताया कि ब्रोंकियोलाइटिस मुख्य रूप से श्वसन सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) के कारण होती है। यह वायरस खांसी या छींक से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से फैलता है। बच्चों में इसके लक्षणों में नाक बहना, बुखार और घरघराहट शामिल है। इसके अलावा, इन्फ्लुएंजा और एडेनोवायरस जैसे वायरस भी श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन रहे हैं। निमोनिया का खतरा भी सर्दियों में अधिक बढ़ रहा है। यह बीमारी बैक्टीरिया या वायरस के कारण होती है, जिससे फेफड़ों में संक्रमण फैलता है और सांस लेने में कठिनाई होती है। ठंड के मौसम में इनडोर गतिविधियों में बढ़ोतरी और भीड़-भाड़ के कारण इस बीमारी का प्रसार तेज हो जाता है। पांच साल से कम उम्र के बच्चे इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
शुरुआती लक्षण पहचानना है जरूरी
डाॅ. अविनाश ने बताया कि इन बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। इनमें गले में खराश, कर्कश आवाज, स्वाद या गंध में परेशानी, थकान, सांस लेने में कठिनाई, तेज बुखार, खांसी और कभी-कभी मतली या उल्टी होने लगती है।
अभिभावक बरतें विशेष सावधानी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश रस्तोगी ने बताया कि बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर बच्चों में सांस लेने में कठिनाई, तेज बुखार या अन्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज और सही बचाव से बच्चों में होने वाले सांस संबंधी रोग की रोकथाम की जा सकती है।
इन बातों का रखें ध्यान
– बच्चों को सफाई का ध्यान रखना सिखाएं।
– खाना खिलाने से पहले और खाने के बाद अपना और बच्चे का हाथ जरूर धोएं।
– खांसते या छींकते समय मुंह ढंकने की आदत डालें।
– बीमार लोगों और भीड़ वाली जगहों पर बच्चों को न ले जाएं।
– बच्चों का समय-समय पर टीकाकरण कराएं।
– घर में हवा के अच्छे प्रवाह की व्यवस्था करें।
– बच्चों को पौष्टिक आहार दें और पर्याप्त पानी पिलाएं।
– पांच साल तक के बच्चों को ठंड से बचाएं।
– बच्चों को गुनगुना पानी पिलाएं










