खाद की किल्लत बनी किसानों की समस्या, खुलेआम हो रही कालाबाजारी
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाद की किल्लत बनी किसानों की समस्या, खुलेआम हो रही कालाबाजारी
।। बस्ती।।
किसानों की समस्याएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के वादे करती है, तो दूसरी तरफ वही किसान खाद जैसी आवश्यक वस्तु के लिए हर फसल के मौसम में संघर्ष करता नजर आता है।
हर बार, जब किसान को खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है — चाहे गेहूं की बुवाई हो या धान की रोपाई — उस समय सरकारी समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं होती। किसान समिति के चक्कर लगाते हैं, लेकिन उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “गोदाम में खाद नहीं है” या “जिले में रैक नहीं लग रहा”। इसी के विपरीत, जिले भर की प्राइवेट दुकानों पर वही खाद उपलब्ध रहती है, पर मानक दर से अधिक मूल्य पर। यानी जो DAP और यूरिया किसानों को सरकारी दर पर मिलनी चाहिए, वही खाद बाजार में मुनाफाखोरों के हाथों महंगे दामों में बेची जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, 266.50 रुपये में मिलने वाली यूरिया की बोरी किसानों को 350 रुपये तक में बेची जा रही है।
वहीं DAP की कीमतें 1500 से 1600 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई हैं, जबकि सरकारी दर इससे कहीं कम है। इस समस्या की गंभीरता सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। पूरा जिला खाद संकट और कालाबाजारी की चपेट में है।
सरकारी समितियों पर खाद की अनुपलब्धता और प्राइवेट दुकानों पर भारी स्टॉक — यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी गोदामों में खाद नहीं है, तो प्राइवेट दुकानों पर वही खाद कैसे उपलब्ध हो रही है?
हाल ही में बस्ती जनपद के कुदरहा ब्लॉक से एक मामला सामने आया था, जिसने इन शंकाओं को और पुख्ता कर दिया।
यहां एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें देखा गया कि सरकारी समिति की खाद सीधे एक प्राइवेट दुकान पर उतारी जा रही थी। मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए प्राइवेट दुकान का लाइसेंस सीज किया, और समिति के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। लेकिन इस कार्रवाई के बावजूद खाद वितरण प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा होता है —
क्या इस तरह की छिटपुट कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान होगा?
किसानों को हर फसल के समय खाद की मार क्यों झेलनी पड़ती है?
क्यों समय पर खाद का रैक नहीं पहुंचता? और क्या सरकारी खाद ही कालाबाजारी के जरिए प्राइवेट दुकानों तक पहुंचाई जा रही है?
जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब तक किसानों की हालत नहीं सुधरेगी। सरकार को चाहिए कि वह न केवल खाद वितरण की निगरानी को और मजबूत करे, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके और उनकी मेहनत खेत में रंग ला सके।
















