
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। निशातगंज में ‘खाकी’ का प्रहार: नशे के सौदागरों की अब खैर नहीं।।
रविवार 18 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
लखनऊ। राजधानी का निशातगंज इलाका अब नशे के काले कारोबारियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहेगा। एडीसीपी और एसीपी महानगर की अगुवाई में जिस तरह पुलिस बल ने गलियों और रेलवे लाइनों पर धमक दी है, उसने ड्रग माफियाओं की नींद उड़ा दी है। यह सिर्फ एक ‘रूटीन गश्त’ नहीं, बल्कि उन चेहरों को बेनकाब करने की चेतावनी है जो युवाओं की रगों में जहर घोलकर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।
मैदान में खुद उतरे ‘कप्तान’
अक्सर देखा जाता है कि कागजों पर चलने वाले अभियान धरातल पर दम तोड़ देते हैं, लेकिन इस बार कमान खुद एसीपी महानगर अंकित कुमार ने संभाली है। न्यू हैदराबाद से लेकर गोपाल पुरवा और रेलवे लाइन के सन्नाटों तक, पुलिस की भारी मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि खाकी अब केवल थानों में बैठकर सूचना का इंतजार नहीं करेगी, बल्कि अपराधी के घर तक दस्तक देगी।
नब्ज टटोल रही पुलिस: घर-घर संवाद
इस अभियान की सबसे तीखी धार रही ‘जन-संवाद’। थाना प्रभारी महानगर अखिलेश मिश्रा और उनकी टीम ने बंद कमरों के बजाय सीधे जनता के बीच जाकर जानकारी जुटाई।
- रणनीति: संदिग्ध ठिकानों की घेराबंदी।
- कार्रवाई: संदिग्धों से कड़ी पूछताछ और पहचान।
- संदेश: “या तो नशा छोड़ो, या निशातगंज।”
रेलवे लाइन के ‘अंधेरों’ पर नजर
निशातगंज और उसके आसपास की रेलवे लाइनें लंबे समय से असामाजिक तत्वों का अड्डा बनी रही हैं। पुलिस ने इन अंधेरे कोनों को अपनी जांच के दायरे में लेकर यह स्पष्ट कर दिया है कि अब अपराधी को छिपने के लिए कोई कोना मयस्सर नहीं होगा।
“निशातगंज को नशा मुक्त बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जो युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक जड़ें साफ न हो जाएं।”
— पुलिस प्रशासन का कड़ा रुख
बड़ा सवाल: क्या अब रुकेगा मौत का कारोबार?
पुलिस की इस सक्रियता ने स्थानीय निवासियों में उम्मीद जगाई है। लेकिन सवाल वही है—क्या नशे के ये सौदागर पुलिस की इस सख्ती को झेल पाएंगे या फिर से कोई नया रास्ता निकालेंगे? फिलहाल, एसीपी महानगर की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने माफियाओं के हौसले पस्त कर दिए हैं।
वक्त आ गया है कि समाज और पुलिस मिलकर इस जहर के खिलाफ दीवार खड़ी करें। खाकी तैयार है, क्या आप साथ हैं?










