

सुमिता शर्मा चंद्रपुर महाराष्ट्र:
शासकीय मेडिकल कॉलेज, चंद्रपुर का दीक्षांत समारोह आज सैनिकी विद्यालय के सभागार में उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को विधिवत डिग्री प्रदान की गई। छात्रों के चेहरों पर खुशी और अभिभावकों की आंखों में गर्व इस समारोह की खास पहचान रहा।
इस मौके पर विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने प्रेरणादायक और अनुभवों से भरा संबोधन देते हुए छात्रों को समाज सेवा की दिशा दिखाई।
अपने भाषण में मुनगंटीवार ने कहा, “आज का दिन हर छात्र के लिए खुशी और गर्व का पल है। मेडिकल की डिग्री पूरी करने वाले छात्रों के माता-पिता के चेहरे पर जो खुशी दिख रही है, उसे देखना अपने आप में एक अलग अनुभव है।” अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया, “जब मेरी बेटी एमबीबीएस बनी थी और मैं उसके दीक्षांत समारोह में गया था, उस पल जो खुशी मिली वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। वही खुशी आज मैं यहां मौजूद अभिभावकों के चेहरे पर देख रहा हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “आज जो डिग्री आपको मिली है, वह सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि समाज के स्वास्थ्य की एक बड़ी जिम्मेदारी है।” अपने परिवार की मेडिकल परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके परिवार में 13 डॉक्टर हैं। उनके पिता डॉ. सच्चिदानंद मुनगंटीवार ने 1960 में एमबीबीएस किया था। भाई नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं, जबकि बेटी और दामाद रेडियोलॉजिस्ट हैं।
खुद डॉक्टर न बन पाने का अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान पिता के जेल में होने के कारण वे मेडिकल की पढ़ाई नहीं कर सके। हालांकि, गोंडवाना यूनिवर्सिटी ने मानद डॉक्टरेट देकर उन्हें ‘डॉक्टर’ की उपाधि दी है।
मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा, “मैं परिवार के डॉक्टरों से हमेशा कहता हूं कि आप अपने क्लिनिक में जितने मरीज नहीं देखते, उससे ज्यादा मैं स्वास्थ्य शिविरों में देख लेता हूं।” चंद्रपुर में मेडिकल कॉलेज और कैंसर हॉस्पिटल बनाने में योगदान देने पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि इसके जरिए मेडिकल क्षेत्र में नई पीढ़ी तैयार करने की कोशिश की गई है।
डॉक्टरों के प्रति समाज की श्रद्धा को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “डॉक्टर सच में देवदूत होता है। आज भले ही स्पेशलिस्ट का दौर है, लेकिन पहले एक ही डॉक्टर सारी जिम्मेदारियां निभाता था। मेरे पिता रात-बेरात मरीजों के घर जाकर इलाज करते थे।”
आधुनिक तकनीक के दौर में छात्रों को सतर्क करते हुए उन्होंने कहा, “आज विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में खुद को लगातार अपडेट रखना जरूरी है। तकनीक डॉक्टर की जगह नहीं ले सकती, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल करने वाला डॉक्टर समाज की इलाज प्रक्रिया में बड़ी क्रांति ला सकता है।” टेलीमेडिसिन, रोबोटिक सर्जरी जैसी नई अवधारणाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने छात्रों से नई चुनौतियों को स्वीकार कर संवेदनशील और कुशल डॉक्टर बनने का आह्वान किया।
इस दौरान उन्होंने काव्यात्मक अंदाज में छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा,
_“नई डगर है, नया सफर है,_
_विज्ञान के साथ चलना होगा,_
_मशीनें तो बस जरिया है,_
_पेशंट की धड़कनों को सुनना होगा।”_
इन पंक्तियों के जरिए उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में मानवीय संवेदनाओं का महत्व बताते हुए छात्रों से ‘देवदूत’ बनकर समाज सेवा का संकल्प लेने की अपील की।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि शासकीय मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन के लिए जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। साथ ही सैनिकी विद्यालय के सभागार के सामने एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय के 62 कोर्सेज के केंद्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों कराने के प्रयास भी जारी हैं।
“चंद्रपुर का ‘सी’ हमेशा ‘चैंपियनशिप’ का ही होना चाहिए,” कहते हुए उन्होंने जिले की प्रगति को लेकर उम्मीद जताई।
कार्यक्रम में पद्मश्री पूर्व सांसद डॉ. विकास महात्मे, अधिष्ठाता डॉ. मिलिंद कांबळे, डॉ. मंगेश गुलवाडे, उप अधिष्ठाता डॉ. शरद कुचेवार प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
कुल मिलाकर यह दीक्षांत समारोह छात्रों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बना और समाज सेवा की दिशा में प्रेरणा देने वाला साबित हुआ।









