बस्ती बी़डीए की नाक के नीचे ‘अंधेरगर्दी’: बिना नक्शे के खड़ा हो गया दो मंजिला अस्पताल, अफसर मौन!
बस्ती विकास प्राधिकरण या 'वसूली का अड्डा'? चंद कदमों की दूरी पर हो रहे अवैध निर्माण ने खोली पोल।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती विकास प्राधिकरण: विकास का रक्षक या भ्रष्टाचार का अड्डा? बी़डीए की नाक के नीचे बिना नक्शे के तन गया अस्पताल
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
- साहब के दफ्तर के बगल में ही नियमों की धज्जियां: नवयुग मेडिकल सेंटर पर मेहरबान हुआ बी़डीए!
- सेटिंग-गेटिंग का खेल: पहले पहुंचती है टीम, फिर ‘समझौते’ के नाम पर हो जाता है खेल!
- बस्ती में नक्शा पास नहीं, फिर भी ऊंची हो रही दीवारें; क्या भ्रष्टाचार के बोझ तले दब गया है विभाग?
- बस्ती बी़डीए पर उठ रहे गंभीर सवाल: क्या रसूखदारों के आगे नतमस्तक हो गया है प्राधिकरण?
बस्ती। प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का ढोल पीट रही है, वहीं बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) के जिम्मेदार अधिकारी इस नीति की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला बस्ती शहर के मालवीय रोड स्थित नवयुग मेडिकल सेंटर से जुड़ा है, जहां बी़डीए कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर बिना नक्शा स्वीकृत कराए दो मंजिला अस्पताल की बिल्डिंग खड़ी की जा रही है।
साहब के दफ्तर के पास ‘अंधेरगर्दी’
हैरानी की बात यह है कि जिस विभाग पर शहर के सुनियोजित विकास और अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी है, उसी के दफ्तर के ठीक बगल में इतना बड़ा अवैध निर्माण हो गया और अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी? या फिर भनक तो थी, लेकिन ‘सुविधा शुल्क’ के भारी-भरकम बोझ ने सिस्टम की आंखों पर पट्टी बांध दी? सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल मिलीभगत का है, जहां नियमों को ताक पर रखकर अस्पताल की नींव और दीवारें खड़ी की जा रही हैं।
वसूली का केंद्र बना बीडीए?
बस्ती के गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि बस्ती विकास प्राधिकरण अब केवल ‘वसूली का अड्डा’ बनकर रह गया है। आरोप लग रहे हैं कि प्राधिकरण की टीम पहले अवैध निर्माण स्थल पर पहुंचती है, कागजी खानापूर्ति का डर दिखाती है और फिर पर्दे के पीछे ‘मोटा समझौता’ कर लिया जाता है। समझौता होते ही टीम वापस लौट जाती है और अवैध निर्माण को ‘संरक्षण’ मिल जाता है। शहर में ऐसी दर्जनों इमारतें सीना ताने खड़ी हैं, जिनका नक्शा फाइलों में तो नहीं, लेकिन भ्रष्ट अफसरों की जेबों में जरूर पास हुआ है।
जांच के घेरे में बीडीए की कार्यप्रणाली
नवयुग मेडिकल सेंटर का यह मामला तो महज एक बानगी है। सवाल यह उठता है कि क्या बीडीए के आला अधिकारियों को अपने दफ्तर के पास हो रहे इस निर्माण की जानकारी नहीं है? अगर है, तो अब तक बुलडोजर शांत क्यों है? क्या इस अस्पताल के पास फायर सेफ्टी और पार्किंग जैसे जरूरी मानकों का कोई प्रमाण है?
बस्ती मंडल की जनता अब जवाब मांग रही है। अगर एक आम आदमी अपनी छत डालता है, तो प्राधिकरण का अमला तुरंत पहुंच जाता है, लेकिन रसूखदारों के ‘अवैध किलो’ पर मौन क्यों साध लिया जाता है?
















