

सतना/नागौद। 1 मई को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस* के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सरकारी विभाग और श्रम संगठन विभिन्न प्रकार की घोषणाएं करते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही होती है। नागौद में दिनभर काम की तलाश में मजदूर भटकते रहते हैं, और कई बार निराश होकर बिना काम लगे ही वापस घर चले जाते हैं। नागौद में वन विभाग के ऑफिस के सामने, अगोल मैदान और सब्जी मंडी को जाने वाली रोड के कोने में मजदूर भारी संख्या में कार्य की तलाश में प्रतिदिन आते हैं। यहां पर कुछ दिन पहले तक उनके बैठने के लिए एक सेट नुमा स्थान बना हुआ था, जो मजदूरों के धूप-पानी से बचने के लिए उनका आशियाना था, लेकिन अगोल मैदान को सुंदर बनाने सजाने-सवारने के चक्कर में मजदूरों को अच्छे बनाने का ख्वाब दिखाकर उनका यह आशियाना नष्ट कर दिया गया, अब बेचारे रोड के दोनों तरफ खड़े रहते हैं काम के इंतजार में। बड़ी संख्या में दूरांचल से मजदूर आते हैं,और रोड में खड़े रहते हैं, कई वहां से वाहन लेकर निकलना कठिन होता है। यह पूछने पर कि रोड़ में क्यों खड़े होते हो तो एक साथ बोल पड़े जब हमारे बैठने बाली जगह ही तोड़ दी गई तो आखिर जांय कहां? यहीं रोड के किनारे खड़े होकर कार्य की तलाश के लिए नजर लगाए रहते हैं। पता नहीं अब यह कब बनेगा,इस ओर किसका ध्यान कब जाएगा?











