
मैहर जहरीले सांपों को पकड़कर सुर्खियां बटोरने वाला और वन विभाग के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल रहने वाला मैहर के बेरमा थाना कोतवाली क्षेत्र निवासी गफ्फार खान (पिता रज्जाक खान, उम्र 46) असल में गड़ा धन निकालने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का सदस्य निकला। पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू के निर्देशन में देवेंद्रनगर थाना पुलिस ने इस मामले में गफ्फार खान सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
बताया जा रहा है कि गफ्फार खान पन्ना जिले की देवेंद्र नगर थाना पुलिस ने जेल की सलाखो के पीछे भेजा जा चुका है और जमानत पर छूटने के बाद उसने समाज सेवा व सर्प रेस्क्यू का चोला ओढ़कर अपनी छवि सुधारने का प्रयास किया, जिससे वह क्षेत्र में फिर से भरोसेमंद चेहरे के रूप में लोगों को गुमराह कर रहा है।
देवेन्द्र नगर पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, फरियादी आनंद सिंह घोषी (पिता शिव सिंह घोषी, उम्र 26, निवासी ग्राम सकरिया थाना देवेंद्रनगर) ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि तीन व्यक्तियों ने झारखंडन माता मंदिर क्षेत्र में गड़ा धन (सोना) होने का झांसा देकर पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र व गुप्त दान के नाम पर डराया कि पूजा न कराने पर अनहोनी हो सकती है। आरोप है कि आरोपियों ने फरियादी की अंधश्रद्धा का फायदा उठाकर उसे व उसके साथियों को विभिन्न चरणों में मैहर और अजमेर (राजस्थान) ले जाकर पूजा, गुप्त दान व अन्य खर्चों के नाम पर कुल 6 लाख 81 हजार रुपए की धोखाधड़ी की। 29-30 जनवरी 2026 को आरोपियों ने अजमेर शरीफ दरगाह व पुष्कर ले जाकर गुप्त दान कराने का नाटक किया, इसके बाद झारखंडन माता मंदिर क्षेत्र पर गड़ा धन( सोना )निकालने के बहाने फरियादी व उसके साथियों को धोखे में रखकर मौके से फरार हो गए।
फरियादी की रिपोर्ट पर थाना देवेंद्रनगर में अपराध क्रमांक 51/26 के तहत बीएनएस की धारा 318(4) में प्रकरण दर्ज किया गया। थाना प्रभारी उनि संतोष यादव द्वारा घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दिए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुश्री वंदना चौहान एवं एसडीओपी पन्ना एस.पी. सिंह बघेल के मार्गदर्शन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। मुखबिर तंत्र सक्रिय करने पर 1 फरवरी को तीनों आरोपियों — गफ्फार खान, नसीम खान (पिता हबीब खान, उम्र 60, निवासी इमाम चौक मैहर) और राहुल कुशवाहा (पिता रामलाल कुशवाहा, उम्र 26, निवासी जीतनगर बरही मैहर) — को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया।
पुलिस टीम ने आरोपियों के कब्जे से धोखाधड़ी की राशि 5 लाख 50 हजार रुपए नगद, घटना में प्रयुक्त एक अर्टिगा कार (कीमत करीब 13 लाख रुपए) और चार मोबाइल फोन (कीमत करीब 25 हजार रुपए) जब्त किए, जिनकी कुल कीमत करीब 18 लाख 75 हजार रुपए आंकी गई है।
गफ्फार खान हाल ही में मैहर में सर्प मित्र के रूप में चर्चा में आया था, जब उसने पुरानी बस्ती वार्ड क्रमांक-9 में योगेंद्र प्रजापति के घर में घुसे इंडियन ब्लैक कोबरा को सुरक्षित रेस्क्यू कर वन विभाग को सौंपा था। इस घटना के बाद वह क्षेत्र में सर्प रेस्क्यू के लिए पहचाना जाने लगा था।
इस पूरे मामले पर वन विभाग के फॉरेस्ट रेंजर शुभम खरे ने बताया कि गफ्फार खान के अनुसार वन विभाग में किसी भी सरकारी या जिम्मेदार पद पर पदस्थ नहीं है और न ही उसका विभाग से कोई औपचारिक जुड़ाव है। उनके अनुसार, गफ्फार खान को विभाग की ओर से कोई वेतन या पारिश्रमिक नहीं दिया जाता; है । वह मानवीय सेवा भावना से यह काम करता है। सांप व अन्य जीव-जंतु पकड़ने का उसे अच्छा अनुभव है, जिस वजह से जरूरत पड़ने पर लोगों को उसका नंबर दे दिया जाता है और ग्रामीण सीधे उससे संपर्क कर जंगली जानवरों को पकड़वा लेते हैं, जिन्हें बाद में जंगल में छोड़ा जाना बताया जाता है।
आल्हा की फॉरेस्ट विभाग के पास स्नेक कैचर या जहरीले जीव जंतुओं को पकड़ने के लिए कोई अधिकृत अधिकारी कर्मचारी नहीं हैना ही शासन द्वारा प्रदत्त कराया गया, जिसके कारण इस तरह की घटना पर फॉरेस्ट विभाग भी गफ्फार खान को बुलाते हैं।
हालांकि पड़ताल में यह बात सामने आई है कि गफ्फार खान द्वारा जंगली जानवरों को पकड़े जाने के मामले तो अक्सर सामने आते रहे हैं, लेकिन उन्हें विधिवत रूप से जंगल में छोड़े जाने की पुष्टि करने वाले प्रमाण या मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि पकड़े गए जीव-जंतुओं का आगे क्या होता है, हालांकि किसी तस्करी या बिक्री की पुष्टि करने वाला कोई ठोस साक्ष्य फिलहाल सामने नहीं आया है। गफ्फार खान के यह सेवा का चेहरा काफी लोग पूरी हो गया और जिसके आने में यह लोगों का विश्वास बड़ी आसानी से हासिल कर लेते हैं जबकि इसके पीछे की सच्चाई कुछ और ही है।
पुलिस की इस कार्रवाई ने गफ्फार खान के “समाजसेवी सर्प मित्र” वाले चेहरे के पीछे का दूसरा पहलू उजागर कर दिया है, और अब यह भी देखने वाली बात होगी कि क्या वन विभाग उसके साथ अपने अनौपचारिक जुड़ाव की समीक्षा करता है।
मैहर ब्यूरो चीफ सुरेन्द्र कुमार शर्मा
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