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नई दिल्ली। 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित रूप से पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और संसद में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को लेकर सरकार से जवाब मांगा। इस बीच कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी अपनी रिपोर्टों में पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया है।
The Guardian ने 24 और 25 जुलाई को प्रकाशित अपनी रिपोर्टों में 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को “police brutality” बताते हुए लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित (alleged) पेलेट गन के इस्तेमाल का उल्लेख किया।
Al Jazeera ने 23 जुलाई की अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रदर्शनकारियों को “pellet guns and batons” का सामना करना पड़ा तथा कार्रवाई में कम-से-कम 200 लोगों के घायल होने का दावा किया। एक अन्य रिपोर्ट में भी उसने राष्ट्रीय राजधानी में अर्धसैनिक बलों द्वारा कथित पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों का उल्लेख किया।
वहीं PBS NewsHour ने 27 जुलाई की अपनी रिपोर्ट में कहा कि सरकारी कार्रवाई के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के साथ “even pellet guns” का भी इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने आए।
इस मामले की सुनवाई के दौरान 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर पर RAF द्वारा इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद (ammunition) का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि यदि पेलेट गन का उपयोग किया जाता है, तो वह केवल असाधारण (exceptional) परिस्थितियों तक सीमित होना चाहिए।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि पेलेट गन के वास्तविक इस्तेमाल को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। अदालत में मामले की सुनवाई जारी है और संबंधित तथ्यों की जांच न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। ऐसे में यह कहना कि पेलेट गन का इस्तेमाल निश्चित रूप से हुआ था या इसके लिए कौन जिम्मेदार था, फिलहाल न्यायिक जांच और उपलब्ध आधिकारिक साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।






