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इटावा की 100 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक विरासत ‘चौबे गुरु नारायण टेक्निकल इंस्टीट्यूट (आईटीआई)’ को बचाने की उठी जोरदार मांग
इटावा, उत्तर प्रदेश। जनपद इटावा के ब्लॉक बड़पुरा की ग्राम पंचायत मानिकपुर बिसू में वर्ष 1923 में स्थापित चौबे गुरु नारायण टेक्निकल इंस्टीट्यूट (आईटीआई), जिसने वर्ष 2023 में अपनी शताब्दी (100 वर्ष) पूर्ण कर ली, आज उपेक्षा, जर्जर भवन, कर्मचारियों की भारी कमी और अवैध कब्जों की समस्या से जूझ रहा है। यह संस्थान केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि इटावा और उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक धरोहर है। संस्थान के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे एडवोकेट संदीप कुमार भारतीय ने कहा कि यह संस्थान प्रदेश की प्रारंभिक तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में से एक रहा है। यहां से शिक्षा प्राप्त कर हजारों विद्यार्थियों ने सरकारी सेवाओं में चयन प्राप्त किया, अपने परिवारों और समाज का नाम रोशन किया तथा सम्मानपूर्वक सेवा से सेवानिवृत्त भी हुए। उन्होंने कहा कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के बाद भी यह ऐतिहासिक संस्थान बदहाल स्थिति में है। भवन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं है और संस्थान के परिसर के एक हिस्से पर अवैध स्थायी एवं अस्थायी कब्जों की शिकायतें लंबे समय से बनी हुई हैं। एडवोकेट संदीप कुमार भारतीय ने बताया कि वर्ष 2017 से लगातार इस संस्थान के संरक्षण, जीर्णोद्धार और अवैध कब्जों को हटवाने के लिए जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित अधिकारियों को अनेक बार ज्ञापन दिए गए। समाज कल्याण मंत्री श्री असीम अरुण तथा पर्यटन मंत्री श्री जयवीर सिंह को भी इस विषय में अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस और प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व एसडीएम सदर इटावा श्री विक्रम राघव के स्तर पर अवैध कब्जों के संबंध में जांच कराई गई थी, किंतु समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। एडवोकेट संदीप कुमार भारतीय ने जिलाधिकारी इटावा, समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश, जनप्रतिनिधियों, इतिहासकारों, शिक्षाविदों, पूर्व छात्रों और इटावा के सभी जागरूक नागरिकों से अपील की कि इस 100 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से निम्न प्रमुख मांगें कीं: 1. चौबे गुरु नारायण टेक्निकल इंस्टीट्यूट के भवन का तत्काल जीर्णोद्धार कराया जाए। 2. संस्थान में स्वीकृत सभी पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं। 3. परिसर से सभी अवैध स्थायी एवं अस्थायी कब्जे हटाए जाएं। 4. इस संस्थान को “राज्य संरक्षित ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक विरासत” घोषित किया जाए। 5. संस्थान के संरक्षण और विकास के लिए विशेष बजट स्वीकृत किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इटावा अपनी एक अमूल्य ऐतिहासिक विरासत खो देगा। यह केवल एक भवन को बचाने का प्रश्न नहीं, बल्कि प्रदेश के तकनीकी शिक्षा इतिहास और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का विषय है।








