


कुशीनगर / सुकरौली बाज़ार , सुकरौली विकासखंड की ग्राम सभा चिलुआ की प्रधान श्रीमती प्रेमा देवी ने डीएम और सीडीओ को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। प्रेमा देवी का आरोप है कि खंड विकास कार्यालय के अधिकारी गांव में कोई विकास कार्य नहीं करने दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो काम पहले कराया गया, उसका भुगतान भी नहीं किया गया है। मामले में एक पुराने पंचायत भवन का विवाद भी जुड़ा है। प्रधान पति मिर्जा यादव के अनुसार, पिछले प्रशासक के समय में बनाया गया यह भवन घटिया सामग्री से बना है। भवन अधूरा है और इसकी छत से पानी टपकता है। विकास अधिकारियों का कहना है कि प्रधान को पहले पंचायत भवन को पूरा करवाना होगा। इसके बाद ही अन्य विकास कार्य की अनुमति दी जाएगी। लेकिन प्रधान पति का कहना है कि वह घटिया गुणवत्ता वाले भवन को क्यों पूरा करें, जो कभी भी ढह सकता है।प्रधान पति ने सवाल उठाया है कि वह ग्राम सभा का पैसा, जो सड़क, खरंजा और शौचालय जैसे विकास कार्यों के लिए आया है, उसे पंचायत भवन की मरम्मत में क्यों लगाएं। उन्होंने पंचायत भवन के निर्माण के लिए आए पैसे के बारे में भी जवाब मांगा है कि किसने उसे इतना घटिया तरीके से बनवाया ? जो पूरा बनने से पहले ही टपकने लगा? इसी से तंग आकर मैं कुशीनगर डीएम और सीडीओ को अपना इस्तीफा सौंपा हूं। हमने इस प्रकरण को मुख्यमंत्री समेत तमाम बड़े अधिकारियों को भी पत्र के माध्यम से सूचित किया है। लेकिन अभी किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। मेरे गांव की विकास कार्य बाधित है। मेरे पर दबाव बनाया जा रहा है कि पहले आप पंचायत भवन को पूर्ण कराए उसके बाद ही गांव का कोई विकास कार्य कराया जाएगा।
सहायक विकास अधिकारी बोले- ग्राम प्रधान नहीं करा रहे हैं आधा अधूरा पंचायत भवन का निर्माण
- इस विषय पर जब सहायक विकास अधिकारी राम आशीष गौतम से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि कौन कहता है गांव में विकास नहीं हुआ है लगभग 60 लाख रुपए का गांव में विकास कराया गया है। पंचायत भवन आधा अधूरा है बार-बार प्रधान को बनाने के लिए कहा जा रहा है लेकिन प्रधान उस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
- जब तक पंचायत भवन नहीं बनेगा तो कर्मचारी कहां बैठेंगे। पंचायत भवन निर्माण में बचे हुए 11 लाख रुपए के विषय में जब ADO पंचायत से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ग्राम सभा की निधि में वह पैसा पड़ा हुआ है। उन्होंने गांव में कराए गए 70 लाख से विकास कार्यों की सूची भी देने की बात कही।
- वहीं इस विषय पर जब खंड विकास अधिकारी सुकरौली उषा पाल से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि सभी ग्राम सभा में सबसे पहले विद्यालय का कायाकल्प कराना है। उसके बाद ही गांव का कोई काम होगा। ब्लॉक के सभी ग्राम प्रधानों को निर्देशित कर दिया गया है। चिलुवा ग्राम प्रधान द्वारा कायाकल्प का काम बहाने बाजी करके नहीं कराया जा रहा है।
- कायाकल्प के तहत विद्यालयों को कायाकल्पित करना है। जिसमें शौचालय, बालिका शौचालय, दिव्यांग शौचालय, विद्यालय का बाउंड्री बाल प्रमुख रूप से है। सुकरौली विकासखंड के लगभग सभी गांव में कायाकल्प का काम पूरा हो चुका है लेकिन चिलुवा गांव में अभी काम पूरा नहीं हुआ जब तक कायाकल्प का काम पूरा नहीं होगा गांव में और कार्यों का पेमेंट नहीं दिया जाएगा।
- ग्राम प्रधान पति का कहना है कि गांव के विद्यालय का कायाकल्प करने में काफी विवाद है। काफी संख्या में लोग विद्यालय के जमीन का कब्जा किए हुए हैं। बीडियो मैडम चाहती हैं कि बिना जमीन खाली कराए कहीं भी शौचालय का निर्माण कर दिया जाए मैं ऐसा नहीं करूंगा। मैं पूरे गांव से गाली नहीं सुनूंगा।
- जब तक विद्यालय की पैमाइश करा पूरे जमीन को एक्वायर नहीं कर लिया जाएगा तब तक कायाकल्प का काम नहीं किया जाएगा। मैं तो अपना इस्तीफा डीएम और सीडीओ को सौंप आया हूं। अभी तक क्या हुआ कुछ पता नहीं चल रहा है।
- इस विषय पर जब खंड विकास अधिकारी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि इस्तीफा देने का तरीका वैसे थोड़े है। उसकी प्रक्रिया होती है।
- चिलुआ ग्राम सभा की पिछली प्रधानी काल अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थी। प्रधानी काल समाप्त होने के बाद जो प्रशासक नियुक्त थे उनके द्वारा पंचायत भवन का निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन बनने के कुछ दिन बाद ही छत टपकने की शिकायत आने लगी।
- ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बने हुए पंचायत भवन की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। इस विषय पर जब उसे समय एडीओ पंचायत से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा था कि अभी आधा पैसा बचा हुआ है जल्द ही उसकी मरम्मत कार्य नहला वगैरह करा दिया जाएगा। उसके बाद चुनाव हुआ और उस गांव से श्रीमती प्रेमा देवी निर्वाचित हुई।
- खंड विकास कार्यालय द्वारा उन पर पंचायत भवन बनाने का दबाव आने लगा लेकिन वह पंचायत भवन को नहीं बनवाये। बार-बार कहते रहे कि इस थर्ड क्लास के पंचायत भवन जिसमें सीमेंट और छरिया थर्ड क्वालिटी का इस्तेमाल किया गया है। मैं इसे बनवाकर दोष अपने सिर क्यों लूं।
- 4 साल बीतने के बाद पंचायत भवन को लेकर ग्राम सभा की विकास को रोक दिया गया। बार-बार ग्राम प्रधान पर पहले पंचायत भवन को बनाने का दाबाव आने लगा। जब ग्राम प्रधान ने पंचायत भवन नहीं बनाया तो उनके गांव का विकास कार्य रोक दिया गया। अब सवाल यह उठता है कि पंचायत भवन को किसने बनाया था पंचायत भवन मद में आया हुआ पैसा कहां गया?
- जबकि वहीं खंड विकास अधिकारी इस प्रकरण से अनभिज्ञता जताई बीडीओ ने कायाकल्प के वजह से गांव के विकास कार्यों को रोकने की बात कह रही है जबकि ग्राम प्रधान का कहना है की पुराना पंचायत भवन न बनवाने की वजह से उनके गांव का विकास कार्य रोक दिया गया है।




