

गाजीपुर,11 मई – शहर के रौजा स्थित गाजी मियां की बाग में कास्तकारी की जमीन को जबरन वक्फ और कब्रिस्तान की संपत्ति घोषित करने की कथित साजिश का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रजदेपुर देहाती गांव के निवासी वारिस खान, जमाल खान, अली अहमद उर्फ पप्पू और रवि अहमद ने शनिवार को एक पत्रकार वार्ता में गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने बताया कि विवादित जमीन, जो आराजी नंबर 181 के नाम से दर्ज है, लगभग छह बीघा 16 बिस्वा है और उनके पूर्वजों के नाम वर्ष 1880 से तहसील रिकॉर्ड में दर्ज है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ दबंग किस्म के लोग इस जमीन को वक्फ और कब्रिस्तान की संपत्ति बताकर अवैध रूप से कब्जा करना चाहते हैं और झूठी अफवाहें फैला रहे हैं।
वार्ता में वारिस खान ने कहा,“यह हमारी पुश्तैनी जमीन है,जिस पर वर्षों से कास्तकारी होती आ रही है। यदि यह वक्फ की जमीन होती तो तहसील रिकॉर्ड में इसका उल्लेख होता,और दानदाता का नाम दर्ज होता। लेकिन ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।”उन्होंने यह भी बताया कि दो दिन पहले विरोधियों ने उन पर हमला किया। पुलिस को बुलाने पर दोनों पक्षों को कोतवाली बुलाया गया, लेकिन आरोपियों ने कागजात दिखाने से इनकार कर दिया और कोतवाली नहीं पहुंचे। पीड़ित पक्ष कागजात लेकर घंटों इंतजार करता रहा। पीड़ितों ने प्रशासन से अपील की है कि उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन वापस दिलाई जाए और दबंगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
(रिपोर्टर – स्थानीय संवाददाता)
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