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कांवरियों की राह में प्रशासनिक गड्ढे: आस्था और असुविधा की दोराहे पर सावन

बाबा बासुकीनाथ की ओर बढ़ते कांवरियों को सड़कें दे रहीं हैं दुःखद चुनौतियाँ, प्रशासन ने सुरक्षा की जिम्मेदारी भोलेनाथ पर छोड़ दी क्या?

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सावन का पवित्र महीना आरंभ हो चुका है और बाबा बासुकीनाथ तथा वैद्यनाथ धाम की ओर श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। चारों ओर बोल बम के जयघोष गूंज रहे हैं। कांवरियों की सेवा में प्रशासन तत्पर होने का दावा कर रहा है, परंतु जब श्रद्धालु इन सेवाओं से गुजरते हैं तो सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। दुमका-हंसडीहा मुख्य मार्ग पर स्थित नोनीहाट का दृश्य इन दावों की पोल खोलता नज़र आ रहा है। हौंडा शोरूम के समीप बने एक स्पीड ब्रेकर के दोनों ओर गहरे गड्ढों ने सड़क को तालाब में बदल दिया है। बरसात के पानी से भरे इन गड्ढों में से होकर निकलना अब न केवल वाहन चालकों के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि पैदल चल रहे कांवरियों के लिए भी एक खतरनाक सफर साबित हो रहा है। मिली जानकारी के अनुसार कई छोटे वाहन इस गड्ढे में अचानक घुसने के वजह से दुर्घटना के शिकार भी हो चुके हैं। जिसमे यात्रियों को आंशिक चोटें भी आई हैं। अब आगे दुर्घटना से बचने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा ही गड्ढे में एक डब्बे में मिट्टी भरके उसमे लाल कपड़ा लहराया गया है। जिससे वहां बना गड्ढा यात्रियों को दिखाई दे जाए और कोई दुर्घटना ना हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग की स्थिति दिन ब दिन खराब होती जा रही है। लेकिन अब जब सावन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, तब यह मार्ग दुर्घटनाओं का अड्डा बनता जा रहा है। एक ओर बाबा बासुकीनाथ और बाबा वैद्यनाथ धाम में कांवरियों के लिए पांच सितारा सुविधाओं की चर्चा हो रही है। जहाँ लर विश्राम स्थल, चिकित्सा सेवा, भोजनालय आदि मौजूद हैं। लेकिन इन श्रद्धालुओं को उन सुविधाओं तक पहुँचने के लिए जिन मार्गों से गुजरना पड़ रहा है, उनकी हालत देखकर लगता है कि शायद सड़क विभाग ने आंखें मूंद ली हैं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा का जिम्मा भोलेनाथ पर ही छोड़ दिया है। नोनीहाट से हंसडीहा तक का यह मार्ग कांवरियों के लिए प्रमुख रास्ता है, क्योंकि बासुकीनाथ से देवघर तक फोर-लेन निर्माण कार्य के कारण इस वर्ष श्रद्धालु इसी रास्ते से आगे बढ़ रहे हैं। भारी वाहनों की आवाजाही और गड्ढों से भरे रास्ते के बीच श्रद्धालुओं को अपने जीवन को जोखिम में डालकर चलना पड़ रहा है। यह केवल एक स्थान की बात नहीं है बल्कि इस पूरे मार्ग में कई ऐसे स्थान हैं जहां सड़कें उखड़ी हुई हैं, जलजमाव आम बात है, और किसी भी वक्त दुर्घटना घट सकती है। इन खतरनाक हालातों को देखकर यह कहना भी गलत नही होगा कि यह सड़क भक्ति पथ नहीं बल्कि भवसागर बन चुकी हैं। इस स्थिति को देखकर यह कहना भी गलत नहीं होगा कि केवल आयोजन स्थल पर सजावट और सुविधा देकर दायित्व की इतिश्री नहीं हो जाती असली श्रद्धा तो रास्तों को सुरक्षित बनाकर दिखाई जाती है। श्रद्धालुओं को तो बाबा भोलेनाथ पर विश्वास है, लेकिन यह विश्वास तब और भी ज्यादा मजबूत होगा जब व्यवस्था भी श्रद्धालुओं का साथ दे ना कि उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ करे। अन्यथा इस बार के सावन में हर हर महादेव के साथ लोग जय सड़क सुधार महादेव का नारा लगाने को विवश हो जाएंगे।

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