
सहारनपुर में बेकाबू डंपर का कहर – भेड़ों के झुंड को कुचला, 11 की मौत, 8 घायल
📍 दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर दर्दनाक हादसा, गांव सढौली दुलीचंदपुर के पास घटी घटना
सहारनपुर जनपद के रामपुर मनिहारान थाना क्षेत्र में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर गांव सढौली दुलीचंदपुर के पास एक तेज रफ्तार अनियंत्रित डंपर ने भेड़ों के झुंड को रौंद दिया। इस हादसे में 11 भेड़ों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 8 भेड़ें गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना इतनी भयावह थी कि देखने वालों की आंखें नम हो गईं और इलाके में मातम पसर गया।
हादसा कैसे हुआ
रामपुर मनिहारान के मोहल्ला सराय निवासी शुभम रोजाना की तरह अपनी 19 भेड़ों को जंगल में चराने के लिए ले जा रहा था। सुबह करीब 10 बजे के आसपास जैसे ही वह गांव सढौली दुलीचंदपुर के पास पहुंचा, पीछे से आ रहा डंपर अचानक अनियंत्रित हो गया और भेड़ों के झुंड में घुस गया। हादसा इतना भीषण था कि कई भेड़ें मौके पर ही तड़पकर ढेर हो गईं। शुभम ने समय रहते सड़क किनारे छलांग लगाई और अपनी जान बचाई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, डंपर तेज रफ्तार में आ रहा था और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया और वाहन को वहीं छोड़कर भाग खड़ा हुआ।
मौके पर पहुंची पुलिस
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सत्येंद्र नागर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने डंपर को जब्त कर लिया और आरोपी चालक की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने शवों को सड़क से हटवाकर ग्रामीणों की मदद से दफनाने की व्यवस्था कराई। घायल भेड़ों का उपचार स्थानीय पशु चिकित्सक की देखरेख में किया जा रहा है।
थाना प्रभारी ने बताया कि चालक की पहचान की जा रही है। उसके खिलाफ लापरवाही और पशु क्रूरता की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
पशुपालक का बड़ा नुकसान
पशुपालक शुभम ने बताया कि उसने बड़ी मेहनत और लगन से इन भेड़ों को पाला था। प्रत्येक भेड़ की कीमत कई हजार रुपये थी और उनका दूध व ऊन उसकी आमदनी का मुख्य साधन था। अचानक हुए इस हादसे ने उसकी आजीविका छीन ली है। शुभम का कहना है कि वह गरीब परिवार से है और इस नुकसान की भरपाई उसके लिए नामुमकिन है।
ग्रामीणों का आक्रोश
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर आए दिन भारी वाहनों की तेज रफ्तार हादसों को जन्म देती है। प्रशासन ने कई बार चालकों को चेताया, लेकिन उसके बावजूद भी नियमों की अनदेखी जारी है। ग्रामीणों ने हाईवे पर स्पीड ब्रेकर लगाने, पुलिस गश्त बढ़ाने और चालकों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन तभी हरकत में आता है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है। उन्होंने मांग की कि सरकार को पशुपालक को मुआवजा देना चाहिए और दोषी चालक को जल्द गिरफ्तार करना चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हाइवे पर बिना किसी रोक-टोक के दौड़ते डंपर और ट्रक आम लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। न तो चालकों पर सख्ती से निगरानी होती है और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं। कई बार ऐसे हादसों में इंसानों की जान भी जाती है, लेकिन उसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी रहती है।
निष्कर्ष
सहारनपुर का यह हादसा केवल एक पशुपालक शुभम के परिवार का दुख नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि सड़क सुरक्षा की अनदेखी कितनी घातक साबित हो सकती है। 11 भेड़ों की मौत और 8 के घायल होने की यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और तेज रफ्तार के खतरों की ओर इशारा करती है। ग्रामीणों की मांग है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं, साथ ही पीड़ित पशुपालक को उचित मुआवजा दिया जाए।
👉 यह हादसा सिर्फ भेड़ों की जान लेने वाला नहीं, बल्कि यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कब तक सड़कों पर अनियंत्रित वाहन मौत का पहिया बनकर घूमते रहेंगे।
✍️ रिपोर्ट : एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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