उत्तर प्रदेशबस्तीराम मंदिर अयोध्या

।।‌गर्भपात की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अवध चिकित्सा केंद्र को किया सील ।।

।। राम प्रसाद नामक व्यक्ति चिकित्सक की कुर्सी पर बैठकर ओपीडी करते हुए पाया गया,केंद्र की दीवार पर लगे पंजीकरण प्रमाण पत्र में डॉ. अरविंद खरे का नाम चिकित्सक के रूप में दर्ज था।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। मिल्कीपुर में अवैध चिकित्सा केंद्र पर बड़ी कार्रवाई, गर्भपात की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अवध चिकित्सा केंद्र को किया सील ।।

13 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।

मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवध चिकित्सा केंद्र को सील कर दिया है। यह कदम अवैध गर्भपात से जुड़ी लिखित शिकायत मिलने और निरीक्षण के दौरान सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद उठाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच में पाया कि केंद्र पर नियमों को ताक पर रखकर चिकित्सा सेवाएं दी जा रही थीं, जिससे मरीजों की जान को खतरा बना हुआ था।

पहले निरीक्षण के दौरान टीम को चौंकाने वाली स्थिति देखने को मिली। राम प्रसाद नामक व्यक्ति चिकित्सक की कुर्सी पर बैठकर ओपीडी करते हुए पाया गया, जिसने खुद को अवध चिकित्सा केंद्र का संचालक बताया। वहीं, केंद्र की दीवार पर लगे पंजीकरण प्रमाण पत्र में डॉ. अरविंद खरे का नाम चिकित्सक के रूप में दर्ज था, जिसकी वैधता 4 नवंबर 2024 से 31 मार्च 2025 तक बताई गई थी। जब डॉ. खरे से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अयोध्या स्थित अपने अस्पताल में कार्यरत हैं और केंद्र पर उनकी उपस्थिति नहीं रहती, जिससे यह साफ हो गया कि वहां कोई अधिकृत चिकित्सक मौजूद नहीं था।

निरीक्षण के दौरान केंद्र में भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं और आईवी फ्लुइड बरामद हुए। इस्तेमाल की गई डिस्पोजेबल सिरिंजें खुले में पड़ी थीं और बायोमेडिकल कचरा बिना किसी मानक के बिखरा हुआ था। एक कमरे में भर्ती मरीजों की चादरों पर खून के धब्बे मिले, जिससे हालात की गंभीरता और बढ़ गई। हैरानी की बात यह भी रही कि केंद्र के साइन बोर्ड पर आयुर्वेदिक या यूनानी पद्धति का कोई उल्लेख नहीं था, जबकि शिकायत में अवैध रूप से एलोपैथिक इलाज किए जाने की बात कही गई थी।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने दोबारा सूचना दी कि सील किए जाने के बावजूद केंद्र को लकड़ी का दरवाजा खोलकर अवैध रूप से चलाया जा रहा है। इस पर सीएचसी मिल्कीपुर के अधीक्षक को फिर से निरीक्षण के निर्देश दिए गए। दोबारा जांच के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति एक बुजुर्ग मरीज का इलाज करते और एलोपैथिक दवाएं लिखते हुए पाया गया। पूछताछ करने पर वह व्यक्ति निरीक्षण दल को धक्का देकर मौके से फरार हो गया।

पुनः निरीक्षण में यह भी सामने आया कि पहले पाए गए अभिलेख, दवाएं, बेड की चादरें और एक पूरा बेड वार्ड से हटा दिए गए थे। दीवार पर टंगे प्रमाण पत्र को बदलकर नया प्रमाण पत्र लगाया गया था। बायोमेडिकल वेस्ट को चिकित्सालय के अंदर से हटाकर छत पर खुले में फेंक दिया गया था। इसके बावजूद केंद्र खुला मिला और मरीजों की भीड़ लगी हुई थी।

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