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बलौदाबाजार में दरिंदगी की इंतहा: अशक्त वृद्धा से दुष्कर्म, 72 दिन तक जिंदगी से जूझने के बाद मौत — घटना के पश्चात 2 आरोपी किया गया था गिरफ्तार

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बलौदाबाजार। नगर में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। एक बीमार और अशक्त वृद्ध महिला के साथ हुई दरिंदगी के बाद, वह करीब ढाई महीने तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही, लेकिन अंततः 18 अप्रैल 2026 को उसने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक अंत ने घटना को और भी भयावह बना दिया है।
जानकारी के अनुसार, प्रार्थी ने 6 फरवरी 2026 को थाना सिटी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसी दिन दोपहर लगभग 2 बजे, दो आरोपियों ने मिलकर एक असहाय वृद्ध महिला के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। वारदात के दौरान एक आरोपी दुष्कर्म करता रहा, जबकि दूसरा आरोपी मौके पर मौजूद रहकर उसे संरक्षण और सहयोग देता रहा।
घटना के बाद जब प्रार्थिया मौके पर पहुंची, तो दोनों आरोपी वहां से भाग निकले। गंभीर हालत में महिला को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लंबे समय तक उसका इलाज चलता रहा। हालत लगातार नाजुक बनी रही और अंततः 18 अप्रैल को उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
तेजी से हुई पुलिस कार्रवाई, 2 घंटे में आरोपी हिरासत में
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता के निर्देश पर सिटी कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट दर्ज होने के मात्र 2 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी:
श्याम यादव (36 वर्ष), निवासी नयापारा, वर्तमान पता वार्ड 19, गैस गोदाम रोड
मोहन पंजवानी (65 वर्ष), निवासी वार्ड 19, गैस गोदाम रोड
पुलिस ने अपराध क्रमांक 105/2026 के तहत धारा 64(2)(k) एवं 332(b) बीएनएस में मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मौत के बाद बढ़ा मामला और आक्रोश
वृद्ध महिला की मौत के बाद अब यह मामला और गंभीर हो गया है। पूरे क्षेत्र में शोक और गुस्से का माहौल है। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि एक असहाय और बीमार महिला भी दरिंदों की हवस से सुरक्षित नहीं रह सकी।
न्याय की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय और कठोर दंड ही समाज में भय और कानून का सम्मान स्थापित कर सकता है।
यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है—जहां संवेदनाएं मर रही हैं और इंसानियत सवालों के घेरे में खड़ी है। अब सबकी निगाहें न्याय व्यवस्था पर टिकी हैं, कि इस मासूम पीड़िता को कब और कैसे न्याय मिलेगा।

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