
ई-विकास प्रणाली से उर्वरक टोकन प्राप्त करने की प्रक्रिया से अवगत कराया

जिला ब्योरों गोपाल मारु की रिपोर्ट 9993454360
धार 23 मई 2026। मध्य प्रदेश शासन द्वारा खेती को लाभ का धंधा बनाने एवं किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा ‘कृषि रथ’ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना के विशेष निर्देशानुसार उप संचालक, कृषि एवं कल्याण विकास विभाग श्री ज्ञानसिंह मोहनिया के मार्गदर्शन में विकासखंड मनावर में 16 मई 2026 से 10 दिवसीय कृषि रथ का सुचारू संचालन किया जा रहा है।इसी कड़ी में आज ग्राम सीतापुरी, चिरखान, बोरलई एवं राजुखेड़ी में कृषि रथ के माध्यम से विशेष कृषक संगोष्ठियों का सफल आयोजन किया गया।कृषक संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) मनावर के वैज्ञानिक डॉ. ए.एस. बसेडिया द्वारा उपस्थित कृषकों को आगामी खरीफ मौसम की पूर्व तैयारियों के संबंध में विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने खरीफ की मुख्य फसलों—सोयाबीन, मक्का और कपास की उन्नत किस्मों के चयन, समय पर बुवाई, अनिवार्य बीज उपचार तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन के बारे में अवगत कराया। डॉ. बसेडिया ने फसलों में रोग एवं कीट प्रबंधन हेतु समन्वित उपायों (IPM) की जानकारी देते हुए किसानों को प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी।प्राकृतिक खेती अपनाने एवं मिट्टी परीक्षण की अपीलअभियान के दौरान रथ के माध्यम से किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले आर्थिक व पर्यावरणीय दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। किसानों को भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए जीवामृत, घनजीवामृत, जैविक खाद एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग हेतु प्रेरित किया गया। संगोष्ठी में मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को अनिवार्य रूप से मिट्टी परीक्षण करवाकर अनुशंसित मात्रा में ही उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई, जिससे उत्पादन लागत कम हो सके। साथ ही, खरीफ पूर्व गहरी जुताई से होने वाले लाभों जैसे—नमी संरक्षण, खरपतवार नियंत्रण और कीटों के अंडों/लार्वा के नष्ट होने के बारे में बताया गया।ई-विकास प्रणाली व अंतर्विभागीय योजनाओं की दी जानकारी कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी महेश बर्मन ने किसानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरण और ऑनलाइन टोकन प्राप्त करने की सरल प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से विभागीय योजनाओं का त्वरित लाभ लेने हेतु ई-विकास पोर्टल का उपयोग करने का आह्वान किया। इस अवसर पर कृषि विभाग के साथ-साथ उद्यानिकी, पशुपालन, राजस्व एवं सहकारिता विभाग के मैदानी अधिकारियों ने भी अपने-अपने विभागों की कल्याणकारी योजनाओं और अनुदानों की जानकारी साझा की।कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपस्थित कृषकों द्वारा कृषि संबंधी अपनी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं पर सीधी चर्चा की गई, जिनका मौके पर ही उपस्थित कृषि अधिकारियों व वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी समाधान किया गया। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में स्थानीय प्रगतिशील किसान व विभागीय कर्मचारी उपस्थित थे। अंत में उपस्थित समस्त कृषक बंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।




