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#उदयपुर ब्यूरो चीफ/लिम्बाराम उटेर#
कोटड़ा क्षेत्र में आज गांव स्तरीय बाल संरक्षण समिति (VCPC) सदस्यों का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में मामेर क्षेत्र, कोलिया क्षेत्र एवं जुडा क्षेत्र के समिति सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा, शिक्षा से वंचित एवं ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ना तथा बाल संरक्षण व्यवस्था को गांव स्तर पर मजबूत बनाना था।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने अपने-अपने गांवों की शिक्षा एवं बाल संरक्षण से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। सभी सदस्यों ने संकल्प लिया कि गांव का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा तथा नामांकन के दूसरे चरण में विद्यालय से बाहर रह गए सभी बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया जाएगा।
बैठक में विद्यालय भवनों की जर्जर स्थिति एवं आधारभूत सुविधाओं की कमी पर भी चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने कहा कि सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यालय भवनों की समस्याओं का शीघ्र समाधान आवश्यक है।
प्रशिक्षण के दौरान सभी महिला एवं पुरुष सदस्यों ने यह भी संकल्प लिया कि वे अपने गांव में किसी भी बच्चे से बाल मजदूरी नहीं होने देंगे और न ही किसी को बाल मजदूरी करवाने देंगे। साथ ही बाल विवाह, बाल शोषण एवं बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का निर्णय लिया गया।
प्रतिभागियों ने प्रत्येक पंचायत को बाल मित्र पंचायत बनाने का संकल्प लेते हुए कहा कि बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं समग्र विकास के लिए समुदाय की सहभागिता बढ़ाई जाएगी और हर बच्चे के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशिक्षण में होमा राम गरासिया (कार्यक्रम समन्वयक, कोटड़ा आदिवासी संस्थान) ने गांव स्तरीय बाल संरक्षण समिति की भूमिका, जिम्मेदारियों एवं कार्य करने के प्रभावी तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समिति केवल बैठकों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक गांव में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा एवं संरक्षण से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी करते हुए समय पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने समुदाय से अपील की कि सभी मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करें, जहाँ प्रत्येक बच्चा सुरक्षित रहे, नियमित विद्यालय जाए और अपने अधिकारों से वंचित न हो।
प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बच्चों के हित में सामूहिक रूप से कार्य करने तथा अपने-अपने गांवों को बाल संरक्षण एवं शिक्षा के क्षेत्र में आदर्श बनाने का संकल्प लिया।












