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उत्तर प्रदेशबस्ती

गोविंदपुर डेफरी में माफियाओं का ‘राज’: दिनदहाड़े बागों की खुदाई, प्रशासन मौन

कानून को ठेंगा: अवैध मिट्टी खनन से उजड़ रहा गोविंदपुर डेफरी, ग्रामीण त्रस्त धूल फांकने को मजबूर ग्रामीण, फलता-फूलता रहा खनन माफिया का 'धंधा'

अजीत मिश्रा (खोजी)

प्रशासनिक सुस्ती का फायदा: गोविंदपुर डेफरी में खनन माफियाओं का ‘राज’, धूल फांकने को मजबूर ग्रामीण

  • प्रशासन के नाक के नीचे माफियाओं की मनमानी: बागों का अस्तित्व खतरे में, अधिकारी बेखबर
  • गोविंदपुर डेफरी में ‘मिट्टी के लुटेरे’: सेहत पर भारी अवैध खनन, एसडीएम ने दिए जांच के आदेश

लालगंज: क्या लालगंज थाना क्षेत्र का गोविंदपुर डेफरी गांव कानून के दायरे से बाहर है? यह सवाल आज हर उस ग्रामीण की जुबान पर है जो पिछले लंबे समय से अवैध मिट्टी खनन के कारण नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। बागों को खोदकर मिट्टी माफिया दिनदहाड़े सरकार को चूना लगा रहे हैं और स्थानीय प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है।

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​बाग उजड़ रहे, फेफड़े छलनी हो रहे

​गोविंदपुर डेफरी में चल रहा यह अवैध खनन केवल सरकारी खजाने का नुकसान नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य पर भी सीधा प्रहार है। पंकज, सत्येंद्र, महेंद्र, कुलदीप और चंद्रपाल जैसे दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टर और लोडर की गड़गड़ाहट और उनसे उड़ती धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

​धूल के गुबार से बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, आंखों में संक्रमण फैल रहा है, और सड़क पर गुजरने वाले राहगीरों के लिए यह धूल किसी बड़े हादसे का कारण बन रही है। आखिर कब तक ग्रामीण माफियाओं की इस मनमानी की कीमत अपनी सेहत से चुकाते रहेंगे?

​जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे?

​सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दिनदहाड़े मशीनों से हो रहे इस खनन से संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अनजान बना बैठा है। क्या अधिकारियों की खामोशी इस अवैध कारोबार को मौन सहमति है? बिना किसी वैध अनुमति के धड़ल्ले से चल रहा यह खेल बिना मिलीभगत के संभव ही नहीं है।

​एसडीएम का आश्वासन: क्या यह केवल ‘खानापूर्ति’ है?

​इस गंभीर मामले पर जब एसडीएम शत्रुघ्न पाठक से बात की गई, तो उन्होंने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। लेकिन ग्रामीणों में इस आश्वासन को लेकर संशय है, क्योंकि प्रशासन का ‘आश्वासन’ अक्सर फाइलों में दबकर रह जाता है और माफियाओं का हौसला बढ़ता रहता है।

​जनता अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहती है। क्या प्रशासन अवैध मिट्टी माफियाओं पर लगाम कस पाएगा, या फिर यह मामला भी पुरानी फाइलों के बीच दम तोड़ देगा?

जनता की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या वाकई अवैध खनन रुकेगा, या खनन माफियाओं का यह ‘खुला खेल’ जारी रहेगा?

​इस स्थिति को देखते हुए, क्या आपको लगता है कि प्रशासन को इस मामले में केवल जुर्माना लगाने के बजाय उन मशीनों को भी ज़ब्त करना चाहिए जो अवैध खनन में उपयोग की जा रही हैं?

।। सूत्र।।

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