
पीलीभीत। सीलिंग की जमीन के मामले में जिलाध्यक्ष पर दर्ज रिपोर्ट के विरोध में बृहस्पतिवार को मंडल भर के भाकियू पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट परिसर में प्रशासन के विरोध में प्रदर्शन किया। इस बीच एसपी से हुई वार्ता बेनतीजा रही। एसपी के आश्वासन को पदाधिकारियों ने सिरे से नकार दिया। इसके बाद शाम को डीएम से हुई वार्ता के बाद धरना समाप्त किया गया। इस दौरान डीएम ने कमेटी बनाकर जांच का आश्वासन दिया।

माधोटांडा थाने में भाकियू के जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह पर सीलिंग की जमीन पर पट्टा दिलाने के बदले रुपये लेने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे को लेकर पदाधिकारियों में आक्रोश था। प्रदेश और मंडलीय पदाधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई थी। इसपर बृहस्पतिवार को चक्का जाम का एलान किया गया था। जिले के अलावा अन्य जिलों से पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के कलक्ट्रेट में आने का क्रम सुबह से शुरू हो गया। इसको लेकर पूरे परिसर में पुलिस को तैनात कर दिया गया था। ऐसे में सभी भाकियू पदाधिकारी और कार्यकर्ता कृषि भवन में एकत्र होने लगे। कृषि भवन से सभी भाकियू पदाधिकारी और कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट परिसर पहुंचे। यहां डीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। इसी बीच एक प्रतिनिधिमंडल एसपी से वार्ता करने चला गया। वहां से वापस आने पर बताया कि तीन दिन में जांच के बाद मुकदमा निरस्त करने की बात की जा रही है। इसपर किसी ने सहमति नहीं जताई। सभी कार्यकर्ता वहीं पर धरने पर बैठ गए।
शाम को डीएम संजय कुमार सिंह और अपर जिलाधिकारी ऋतु पूनिया ने वार्ता की। वार्ता के दौरान डीएम ने मामले की जांच करने के लिए कमेटी का गठन करने और तीन दिन मे उसकी रिपोर्ट पर मुकदमा समाप्त करने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद धरना समाप्त कर दिया गया।
इस दौरान जिलाध्यक्ष बरेली तेजपाल गंगवार, जिलाध्यक्ष बदायूं रामचंद्र यादव, लखीमपुर से कुलवंत सिंह, शाहजहांपुर से संदीप सिंह, रामपुर से अजय बाबू गंगवार, प्रेम शंकर वर्मा, अरविंद यादव, हरेराम, कुलवंत सिंह सोनी, विक्रमजीत सिंह खैरा, दिनेश कुमार, सोना देवी, रेशमा वर्मा, बलवीर सिंह आदि कई लोग मौजूद रहे।

