LDA के जनसूचना अधिकारी पर ₹25,000 का जुर्माना, विभाग बोला ‘हमें फर्क नहीं पड़ता’
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) का काम अब विकास नहीं, बल्कि सूचना छुपाने में मास्टरी हासिल करना हो गया है। RTI एक्ट जिसे आम जनता ने अपने अधिकारों का हथियार माना था, अब विभागों ने उसे ‘खेल का मैदान’ बना दिया है। कहीं जवाब देर से, तो कहीं जानकारी बिना सिर-पैर के – और फिर जो चाहे वो समझ लो!
ऐसा ही एक बेहतरीन उदाहरण सामने आया है प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन-2 से, जहां एक जागरूक नागरिक ने 21 नवंबर 2023 को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित पार्किंग नंबर 3 के पास बन रही एक इमारत की जानकारी मांगी। सवाल बड़ा सीधा था – “ये निर्माण वैध है या जादू से बना है?” लेकिन जवाब देने में प्राधिकरण को इतनी तकलीफ़ हुई कि उन्हें सात महीने भी कम लगने लगे।
आवेदक थक-हारकर 5 जुलाई 2024 को अपील दायर करता है, लेकिन LDA की तरफ से जनसूचना अधिकारी साहब इतने व्यस्त निकले कि सूचना आयोग के बुलावे पर भी ‘बॉस की मीटिंग’, ‘अचानक छुट्टी’, ‘ट्रैफिक में फंसे हैं’ जैसे बहाने लेकर आते रहे।
फिर आयोग ने भी सोचा – अब तो हो गया बहुत। 3 जनवरी 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी कर डाला। लेकिन LDA ने इसका भी वही पुराना इलाज निकाला – ‘देखा तो है, पर सीरियस नहीं हैं।’
अंततः 7 मार्च 2025 को राज्य सूचना आयोग ने धारा 20(1) के तहत जनसूचना अधिकारी पर ₹25,000 का जुर्माना ठोक दिया। अब सोचिए – जिस जानकारी का जवाब देना इनका फर्ज़ था, उसी के लिए फाइन लग गया, और विभाग आज भी खामोशी के नशे में चूर है।
आवेदक को तो इस आदेश की आज तक हवा भी नहीं लगी – क्योंकि, क्यों बताएंगे? पारदर्शिता अब सिर्फ पोर्टल की सजावट रह गई है, न कि नीति।
RTI एक्ट आज जिस हालत में है, उसे देखकर तो लगता है – “सूचना मांगना अब सिर्फ़ बहादुरों का काम रह गया है, और जवाब देना अधिकारियों के मूड पर निर्भर!”
और हाँ, अगर आप भी किसी सरकारी विभाग से RTI में जवाब मांग रहे हैं – तो साथ में चाय, समय और ढेर सारा धैर्य रखिए… क्योंकि अब ये प्रक्रिया ‘सूचना’ नहीं, ‘सहनशीलता परीक्षा’ बन चुकी है।
क्या अब भी जागेगा लखनऊ विकास प्राधिकरण? या फिर अगला जुर्माना भी इनके लिए सिर्फ़ चाय की कीमत भर होगा?
पत्रकार मुन्ना तावड़े की ज़मीन हड़पने की बड़ी साज़िश: ‘श्री हनुमान अखाड़ा’ के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप !
27/08/2026
फर्जी प्लॉट फाइल बनाकर 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी, एक आरोपी गिरफ्तार नयापुरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, फर्जी पहचान के जरिए जमीन बेचने का आरोप कोटा। फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत नयापुरा थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी पहचान के जरिए प्लॉट की फर्जी फाइल तैयार कर 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में एक फरार आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस प्रकरण में पुलिस पूर्व में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के अनुसार परिवादी धीरज चंद, निवासी भैरूपाड़ा, अंता, जिला बारां ने नयापुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मुल्जिम ने नाम बदलकर किसी अन्य व्यक्ति के भूखंड की फाइल में अपना फोटो लगाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद स्वयं को भूखंड के वास्तविक मालिक के नाम से प्रस्तुत करते हुए फर्जी फाइल के आधार पर परिवादी को उक्त प्लॉट 20 लाख रुपये में बेचकर धोखाधड़ी की गई। मामले में थाना नयापुरा पर प्रकरण संख्या 328/2025 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में अनुसंधान शुरू किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने लोकेन्द्र सिंह राजावत उर्फ सिन्टू, अकलेश नागर और रफत अहमद खान को पूर्व में गिरफ्तार किया था। जांच में मनोज कुमार प्रजापत के खिलाफ भी अपराध प्रमाणित पाए जाने के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। आरोपी काफी समय से फरार चल रहा था। थाना स्तर पर गठित टीम ने तकनीकी एवं आसूचना तंत्र की मदद से उसकी तलाश कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से प्रकरण के संबंध में आगे अनुसंधान कर रही है। गिरफ्तार आरोपी पुलिस के अनुसार मनोज कुमार प्रजापत पुत्र रामगोपाल, उम्र करीब 45 वर्ष, निवासी आदर्श नगर, किशोरपुरा, कोटा, हाल निवासी ईश्वर नगर थाना क्षेत्र, शोरायपाटन, जिला बूंदी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस टीम की भूमिका कार्रवाई थाना नयापुरा के थानाधिकारी राजपाल सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने की। टीम में सहायक उप निरीक्षक नारायण लाल, कांस्टेबल रामकिशोर और कांस्टेबल राहुल शामिल रहे। पुलिस अधीक्षक कोटा शहर तेजस्वनी गौतम, आईपीएस के निर्देशन तथा वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई इस कार्रवाई को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन संबंधी धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।फर्जी प्लॉट फाइल बनाकर 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी, एक आरोपी गिरफ्तार नयापुरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, फर्जी पहचान के जरिए जमीन बेचने का आरोप कोटा। फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत नयापुरा थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी पहचान के जरिए प्लॉट की फर्जी फाइल तैयार कर 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में एक फरार आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस प्रकरण में पुलिस पूर्व में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के अनुसार परिवादी धीरज चंद, निवासी भैरूपाड़ा, अंता, जिला बारां ने नयापुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मुल्जिम ने नाम बदलकर किसी अन्य व्यक्ति के भूखंड की फाइल में अपना फोटो लगाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद स्वयं को भूखंड के वास्तविक मालिक के नाम से प्रस्तुत करते हुए फर्जी फाइल के आधार पर परिवादी को उक्त प्लॉट 20 लाख रुपये में बेचकर धोखाधड़ी की गई। मामले में थाना नयापुरा पर प्रकरण संख्या 328/2025 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में अनुसंधान शुरू किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने लोकेन्द्र सिंह राजावत उर्फ सिन्टू, अकलेश नागर और रफत अहमद खान को पूर्व में गिरफ्तार किया था। जांच में मनोज कुमार प्रजापत के खिलाफ भी अपराध प्रमाणित पाए जाने के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। आरोपी काफी समय से फरार चल रहा था। थाना स्तर पर गठित टीम ने तकनीकी एवं आसूचना तंत्र की मदद से उसकी तलाश कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से प्रकरण के संबंध में आगे अनुसंधान कर रही है। गिरफ्तार आरोपी पुलिस के अनुसार मनोज कुमार प्रजापत पुत्र रामगोपाल, उम्र करीब 45 वर्ष, निवासी आदर्श नगर, किशोरपुरा, कोटा, हाल निवासी ईश्वर नगर थाना क्षेत्र, शोरायपाटन, जिला बूंदी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस टीम की भूमिका कार्रवाई थाना नयापुरा के थानाधिकारी राजपाल सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने की। टीम में सहायक उप निरीक्षक नारायण लाल, कांस्टेबल रामकिशोर और कांस्टेबल राहुल शामिल रहे। पुलिस अधीक्षक कोटा शहर तेजस्वनी गौतम, आईपीएस के निर्देशन तथा वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई इस कार्रवाई को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन संबंधी धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
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