


मुंबई/महाराष्ट्र: गृह मंत्रालय ने युद्ध जैसी स्थिति से निपटने के लिए 7 मई को कई राज्यों में मॉक ड्रिल कराने के निर्देश दिए हैं। छात्रों और सिविल डिफेंस को विशेष प्रशिक्षण मिलेगा। मॉक ड्रिल आपात स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। जानिए इमरजेंसी के हालात में ये मददगार हो सकती है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों तरफ से युद्ध की आशंका जाहिर की जा रही है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कई राज्यों को सात मई को मॉक ड्रिल के निर्देश दिए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर कोई आपातकालीन स्थिति आए तो अपने देश के नागरिकों को बचाया जा सके। इसमें हवाई हमला होने की स्थिति में क्या करें, ब्लैक आउट होने पर क्या करें और अन्य किस-किस तरह से अपनी सुरक्षा की जाए। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही लोगों को जागरूक करने वाली यह मॉक ड्रिल करने के लिए कहा गया है।सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल क्या है?एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल महज एक एक्सरसाइज भर नहीं है। यह आपात स्थिति में नागरिकों को सुरक्षित रखने का तरीका बताती है। कैसे एक नागरिक मुश्किल हालात में अपना ही नहीं दूसरों का भी मददगार बन सकता है। जंग या फिर आपदा जैसे हालात से निकालने में ये ड्रिल अहम रोल निभा सकती है। यह एक जरूरी अभ्यास है जिसे सभी को गंभीरता से लेना चाहिए।Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur.









