
झालरापाटन, 02 अगस्त को। सुरों के बेताज बादशाह और हिंदी सिनेमा के महान पार्श्व गायक स्वर्गीय मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर संगीत मंच परिवार संस्थान, झालावाड़ द्वारा होटल गीतांजलि, झालरापाटन में 31 जुलाई 2026 को “एक शाम रफी के नाम” संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया गया। रफी साहब के अमर गीतों से सजी इस संध्या में स्थानीय सहित कोटा, जयपुर और गंगापुर सिटी से आए कलाकारों ने एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संस्थान के अध्यक्ष असलम खान (सिंगर) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को रफी साहब की अमूल्य संगीत विरासत से जोड़ना और उनके सदाबहार गीतों को जीवंत बनाए रखना है। कार्यक्रम देर रात तक उत्साहपूर्ण वातावरण में चलता रहा।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्योगपति नरेंद्र गुप्ता ने की। अतिथियों कौशल अग्रवाल, खेराज काशवानी, अनिल अग्रवाल, पर्यटन अधिकारी सिराज कुरैशी, सुरेश रावत, राजकुमार गुप्ता, लक्ष्मीनारायण (कोटा), भारत भूषण जैन, राजू ओशो सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने जीता दिल
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद कलाकारों ने रफी साहब के अमर गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं।
मनोज ने “बड़ी दूर से आए हैं…”, हंसराज सोनी ने “मेरे मितवा मेरे मीत रे…”, राजू ओशो ने “आने से उसके आए बहार…”, सुश्री किंजल ने “क्या हुआ तेरा वादा…”, धनराज गौड़ ने “चले थे साथ मिलकर…”, राजेंद्र मीणा ने “तेरे नाम का दीवाना…”, अजय शर्मा ने “रिमझिम के गीत सावन गाए…”, धनीराम समर्थ ने “याद न जाए बीते दिनों की…”, बालमुकुंद वर्मा ने “तुझको पुकारे मेरा प्यार…”, कैलाशचंद व्यास ने “वादियां ये फिजाएं…”, सुरेंद्र गौतम ने “ये रेशमी जुल्फें…”, विनोद गौड़ ने “चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे…” और नीलिमा अग्रवाल ने “हम थे जिनके सहारे…” प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
इसी क्रम में रामलखन शर्मा ने “बहारों फूल बरसाओ…”, कमल गुप्ता ने “पत्थर के सनम…”, चैतन्य शर्मा ने “तेरी जुल्फों से जुदाई तो नहीं मांगी थी…”, तिथि गुप्ता ने “गुलाबी आंखें…”, पर्यटन अधिकारी सिराज कुरैशी ने “सौ बार जन्म लेंगे…” और संस्थान अध्यक्ष असलम खान ने “तुम मुझे यूं भुला न पाओगे…” गीत प्रस्तुत कर रफी साहब की यादों को जीवंत कर दिया।
वाहिद खान ने “हुस्न वाले तेरा जवाब नहीं…”, जीशान अली ने “चौदहवीं का चांद हो…”, कल्पना ठाकुर ने “ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं…”, अदनान खान ने “ना जा कहीं अब ना जा…”, कुमारी हर्षिता ने “जहां डाल-डाल पर…” तथा गंगापुर सिटी से आए प्रेम दत्ता पंचोली ने “खोया-खोया चांद…” प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
इसके अलावा पूजा सोनी, कल्पना चतुर्वेदी, डॉ. सुप्रभात सक्सेना, स्वरा जैन, अशोक रेड्डीवाल, आशीष मोदी, जगदीश नारायण सोनी, मधु ठाकुर सहित अनेक कलाकारों ने भी अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं।
रफी साहब भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर
अतिथियों ने कहा कि मोहम्मद रफी केवल एक महान गायक नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी मधुर आवाज आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा बनी रहेगी। संगीत मंच परिवार संस्थान द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम उनकी स्मृतियों को संजोने का सराहनीय प्रयास है।
कलाकारों और अतिथियों का किया सम्मान
कार्यक्रम का संचालन असलम खान (सिंगर) एवं चैतन्य शर्मा ने किया। समापन पर सभी कलाकारों एवं अतिथियों को मोहम्मद रफी स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
अंत में कमल गुप्ता, बालमुकुंद वर्मा, धनीराम समर्थ, अध्यक्ष असलम खान तथा उपाध्यक्ष चैतन्य शर्मा ने सभी अतिथियों, कलाकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।





