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सदर की गलियों से लेकर, खेल मैदान से विश्व पटल तक, यामिनी मौर्य का सफर

IMG 20260801 202414सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी का * स्कॉटलैंड (ग्लासगो) में सागर की बेटी यामिनी मौर्य का ऐतिहासिक प्रदर्शन; कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में जीता रजत पदक,स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 31 जुलाई 2026 को सागर जिले की प्रतिभावान बेटी यामिनी मौर्य ने भारत को जूडो (57 किलोग्राम वर्ग) स्पर्धा में रजत पदक दिलाया है। यामिनी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल सागर बल्कि पूरा मध्य प्रदेश और देश गौरवान्वित हुआ है। यामिनी मौर्य सागर के पुरानी सदर निवासी हरिओम मौर्य एवं श्रीमती मिथलेश मौर्य की सुपुत्री हैं। यामिनी ने वर्ष 2008 में सागर स्थित खेल परिसर से प्रशिक्षक दीपक कुमार के मार्गदर्शन में जूडो का अभ्यास शुरू किया था। 5 वर्षों तक कड़े अनुशासन और नियमित प्रशिक्षण के बाद उन्होंने राज्य स्तर पर कई पदक जीते, जिसके बाद उनका चयन राज्य खेल अकादमी में हुआ। अपनी प्रतिभा के दम पर वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचीं। वर्तमान में वे जे एस डब्ल्यू अकादमी (कर्नाटक) में उच्च स्तरीय जूडो प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। यामिनी के नाम वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में जूडो प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने का गौरव भी दर्ज है। यामिनी की इस स्वर्णिम सफलता पर संभागीय आयुक्त अनिल सुचारी, कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल सहित संपूर्ण जिले ने यामिनी और उसके पिता हरिओम मौर्य, माता श्रीमती मिथलेश मौर्य तथा कोच दीपक कुमार को बधाई प्रेषित की है। कड़े संघर्ष से मिली यामिनी की यह जीत यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। यामिनी की यह सफलता मध्य प्रदेश की लाखों बेटियों और युवा खिलाड़ियों को खेलों में नई ऊंचाइयां छूने की प्रेरणा देगी।

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