
सहारनपुर के गंगोह में शिक्षा के मंदिर से शर्मनाक घटना: प्रिंसिपल पर परिजनों से मारपीट का आरोप, पुलिस जांच में जुटी
सहारनपुर। शिक्षा के पवित्र मंदिर से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जनपद सहारनपुर के गंगोह कस्बे में स्थित एक विद्यालय में छात्राओं से लड़कों की बदतमीज़ी की शिकायत लेकर पहुंचे परिजनों के साथ जो कुछ हुआ, उसने न केवल शिक्षा जगत बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों का आरोप है कि जब वे शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रिंसिपल के पास पहुंचे तो प्रिंसिपल ने न केवल उनकी बात अनसुनी कर दी बल्कि उन पर ही मारपीट शुरू कर दी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश और हंगामा फैल गया है।
घटना की शुरुआत: छात्राओं से बदतमीज़ी का आरोप
मामले की जड़ उस समय बनी जब विद्यालय में पढ़ने वाली कुछ छात्राओं ने अपने घर आकर बताया कि विद्यालय में कुछ लड़के उनसे बदतमीज़ी कर रहे हैं। छात्राओं ने अभद्र व्यवहार और परेशान करने की शिकायत की, जिसके बाद परिजनों का खून खौल उठा। परिजनों का मानना था कि प्रिंसिपल से मिलकर समस्या का समाधान निकाला जाएगा और संबंधित छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। लेकिन जब परिजन स्कूल पहुंचे और अपनी शिकायत रखी, तो हालात ने अचानक हिंसक रूप ले लिया।
प्रिंसिपल पर आरोप: शिकायत सुनने के बजाय परिजनों से मारपीट
शिकायत लेकर पहुंचे परिजनों ने जब प्रिंसिपल को घटनाक्रम की जानकारी दी तो उम्मीद थी कि वे गंभीरता से सुनेंगे और आवश्यक कदम उठाएंगे। लेकिन आरोप है कि प्रिंसिपल ने उल्टा परिजनों को डांटना शुरू कर दिया और देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर प्रिंसिपल ने परिजनों के साथ मारपीट कर दी। यह व्यवहार परिजनों को और ज्यादा आक्रोशित कर गया, जिसके चलते स्कूल परिसर में हंगामा खड़ा हो गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
घटना के बाद किसी ने इस पूरे विवाद का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो में परिजनों और प्रिंसिपल के बीच मारपीट और बहसबाजी साफ देखी जा सकती है। वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा का केंद्र बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर शिक्षा के मंदिर में इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं और छात्राओं की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा।
परिजनों का आक्रोश और स्थानीय लोगों का गुस्सा
घटना के बाद परिजनों ने स्कूल के बाहर जमकर हंगामा किया। स्थानीय लोग भी इस विवाद में शामिल हो गए और उन्होंने प्रिंसिपल के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। लोगों का कहना है कि अगर छात्राओं की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तो बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अगर शिक्षण संस्थान ही अभिभावकों और छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेंगे तो समाज में शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा।
पुलिस जांच में जुटी, स्कूल प्रशासन चुप
मामले की सूचना मिलने पर गंगोह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। पुलिस ने परिजनों से शिकायत दर्ज की है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक प्रिंसिपल की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्कूल प्रशासन इस पूरे विवाद पर चुप्पी साधे हुए है, जिससे संदेह और बढ़ रहा है।
शिक्षा जगत पर उठे सवाल
यह घटना सिर्फ एक स्कूल या एक प्रिंसिपल तक सीमित नहीं है बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर छात्राओं की सुरक्षा को लेकर परिजन चिंतित हैं और शिकायत करने पर उन्हें ही पीटा जा रहा है तो यह स्थिति बेहद गंभीर है। समाज का भरोसा स्कूल जैसे संस्थानों पर तब ही कायम रह सकता है जब वहां बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिले।
स्थानीय प्रशासन और सरकार से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोग और अभिभावक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी परिजन या छात्र के साथ इस तरह की घटना न हो। वहीं कुछ अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग से अपील की है कि वे ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाएं और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
निष्कर्ष
सहारनपुर के गंगोह में हुआ यह मामला शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाला है। जिस स्थान पर बच्चों को ज्ञान और संस्कार मिलना चाहिए, वहां इस तरह की घटनाएं होना बेहद शर्मनाक है। यह न केवल समाज के लिए चिंता का विषय है बल्कि शासन और प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती है। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच के बाद दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
✍️ रिपोर्ट : एलिक सिंह
संपादक — समृद्ध भारत समाचार पत्र एवं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
📍 उत्तर प्रदेश महासचिव — भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद
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