
रतलाम में भीड़ से भयभीत मुख्यमंत्री का गुस्सा फूटा एस पी पर
नेपाल की घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और मंत्री तक भयभीत नजर आने लगे हैं. मप्र के बाहुबली मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने तो भीड काबू करने में नाकाम रतलाम जिले के एस पी पर अपने गुस्से का नजला सार्वजनिक रूप से झाड दिया.
नेपाल में जैन-जी क्रांति का असर भारतीय राजनीति पर साफ नजर आने लगा है. इसकी शुरुआत नेपाल से लगे भारत के बिहार से हो भी चुकी है. बिहार के मंत्री श्रवण कुमार को भीड दो बार घेर चुकी है. उन्हें हर बार जान बचाकर भागना पडा. बिहार में भाजपा और जेडीयू की मिलीजुली सरकार है. बिहार से एस आई आर के विरोध में वोट चोर, गद्दी छोड का नारा पूरे देश में गूंज रहा है. सडक से विधानसभा तक इसकी अनुगंज है.
नेपाल की जैन जी क्रांति के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जब मारीशस के प्रधान के साथ अपने संसदीय क्षेत्र बनारस गए तो डरे हुए थे. प्रधानमंत्री इस बार बुलेटप्रूफ कार से बाहर नही निकले. सड़कें कनातों से ढांप दी गई. विपक्षी नेताओं को नजरबंद कर दिया गया. यहाँ तक कि छात्र नेता भी धर लिए गये. प्रधानमंत्री पर भी विपक्ष बनारस में वोट चोरी कर जीतने का आरोप लगा चुका है.
मप्र में सत्तारूढ दल के विधायक भी आपे से बाहर हैं. भिंड में भाजपा विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह एस पी पर मुक्का तान चुके हैं वो भी भीड़ के साथ. यादव मंत्रिमंडल के सदस्य प्रद्युम्न सिंह तोमर मंत्रिमंडल की बैठक में अपनी ही सरकार पर बमक चुके हैं. इन सब घटनाओं के बाद भीड़ से सीधी बात करने के लिए चर्चित मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी अब भयभीत नजर आने लगे हैं.
रतलाम जिले के सैलाना में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अतिवृष्टि से पीडित किसानों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाने गए थे, लेकिन जब उन्होंने अपनी ओर भीड़ को बढते देखा तो वे एसपी पर भड़क गए…. मुख्यमंत्री ने एसपी से ये तक कह दिया कि यदि आपसे नहीं सम्हल रहा तो क्या मै खुद देखूं?
मप्र के मुख्यमंत्री मिलनसार, हंसमुख हैं लेकिन गुस्सा उनकी नाक पर विराजता है.
सवाल ये है कि क्या भारत में सत्तारूढ दल के मंत्रियों में नेपाली क्रांति के बाद सचमुच डर बैठ गया है? यदि नहीं तो वे बौखलाए हुए क्यों हैं? क्यों वे अपने सुरक्षा घेरे को और मजबूत कर रहे हैं. क्यों प्रधानमंत्री जी को अपने संसदीय क्षेत्र में विपक्षियो को नजरबंद करना पड रहा है.
इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि भारत में भी जनता सरकार से नाराज है. जनता का गुस्सा पिछले आम चुनाव में नजर आ रहे हैं. सत्तारुढ दल चार सौ पार का नारा देकर 240 पर ठिठक गया. आम चुनाव के बाद से ही सत्तारूढ दल ने वोट चोरी की तकनीक सीख ली. अब विपक्ष और जनता के बीच तलवारें खिंची हैं. विपक्ष भीड को सडकों पर लाने में कामयाब रहा है. मजे की बात ये है कि सत्तारूढ़ दल के नेता जहाँ खौफ में हैं वही विपक्ष बेखौफ है. उलटे लोकससभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सरकार सुरक्षा प्रोटोकॉल तोडने का आरोप लगा रही है.
सत्तारूढ दल के नेताओं, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों का भय स्वाभाविक है. क्योंकि भारत की सीमा से लगे म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल में जनक्रांति हो चकी है. क्रांति का अगला पडाव भारत ही नजर आ रहा है. इसलिए ऐहतियात बरतना जरूरी है.




