
अजीत मिश्रा (खोजी)
*“टांडा नगर पालिका में विकास नहीं, ‘विलास’ के टेंडर!”*
अध्यक्ष शबाना नाज़ पर भ्रष्टाचार के बादल, जनता पूछ रही — ‘पानी नहीं, पैसा कहाँ बहा?’
अम्बेडकरनगर।
कहते हैं — “नगर पालिका जनता की सेवा के लिए होती है”, लेकिन टांडा की पालिका तो लगता है जनता की जेब हल्की करने के लिए बनी है!
अध्यक्ष शबाना नाज़ और उनके सहयोगियों पर ऐसे आरोप लगे हैं कि सीबीआई भी सुन ले तो पहले पॉपकॉर्न मंगवाए।
*💧 जलकल विभाग में चोरी और ‘छुट्टी’ का अटूट रिश्ता!*
टांडा के जलकल विभाग में चोरी ऐसे होती है जैसे त्योहारों में छुट्टियाँ — हर महीने एक नई!
सकरवाल की टंकी से लाखों के सीसम पेड़ गायब हुए, और इंजीनियर साहब आशीष चौहान उसी वक्त छुट्टी पर थे।
लोग पूछ रहे हैं — “क्या इंजीनियर की छुट्टी का कैलेंडर चोरों के पास पहले से पहुँच जाता है?”
जब जांच शुरू हुई, तो एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी पर मुकदमा डालकर कहानी को ‘थ्रिलर से कॉमेडी’ में बदल दिया गया।
*⛽ डीजल घोटाला: पानी कम, बिल बड़ा*
नगर पालिका में डीजल ऐसे उड़ रहा है जैसे मच्छर मारने का स्प्रे!
अगस्त में ₹80,000 का बिल, सितंबर में एक झटके में ₹2 लाख से ऊपर — और जनरेटर शायद अब तक सोच में पड़ा है कि इतना डीजल गया कहाँ!
अधिशासी अधिकारी अरविंद त्रिपाठी ने बिल देखकर कहा, “ये तो पेट्रोल पंप नहीं, पैसों का पंप है!”भुगतान रुका, लेकिन गबन की रफ्तार अभी भी फुल टैंक पर है।
टेंडर घोटाला: 95 में से 95 हुए फ़ेल — पर ‘क्लीन चिट’ पास।
95 विकास कार्यों के ई-टेंडर ऐसे रद्द हुए जैसे शादी में बारात बिना दूल्हे के लौट आए।
आरोप है कि अध्यक्ष शबाना नाज़ ने ‘अपने’ ठेकेदारों को विकास का पासपोर्ट दे दिया — कमीशन के वीज़ा के साथ।
डीएम ने सारे टेंडर निरस्त कर दिए, हाईकोर्ट ने जांच बैठाई, रिपोर्ट में अध्यक्ष को दोषी बताया…
पर कार्रवाई?
अब तक सिर्फ़ “जांच जारी है” की सरकारी लोरी सुनाई दे रही है।
💰 सभासदों का बवाल: ‘विकास रुका है, पैसा नहीं!’
दर्जन भर सभासदों ने मोर्चा खोल रखा है — उनका कहना है कि सड़कें तो बनती हैं, पर बनते ही टूट जाती हैं।
एक सभासद बोले, “ये सड़कें नहीं, टाइमपास हैं।”
जनता अब पूछ रही है, “हमने वोट से विकास मांगा था, ये ‘घोटाला एक्सप्रेस’ किसने शुरू कर दी?”
जनता की पुकार: अब जांच नहीं, कार्रवाई चाहिए।
शहर के नागरिकों ने सरकार से कहा है — “अगर अब भी जांच नहीं हुई, तो अगला टेंडर शायद ईमानदारी का ही निकालना पड़ेगा।”
नगर पालिका प्रशासन ने चुप्पी साध ली है, पर अफसरों का कहना है कि मामला गरम है, और सच्चाई सामने आते ही कई कुर्सियाँ ठंडी पड़ सकती हैं।
अंत में टांडा की जनता का सवाल:
“जब पानी नहीं आ रहा, सड़कें टूट रही हैं, और डीजल उड़ रहा है…तो टांडा में ‘विकास’ आखिर किसके घर सप्लाई हो रहा है?”














