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नई दिल्ली। सहारा ग्रुप की आर्थिक स्थिति लंबे समय से संकट में है। कई प्रॉपर्टी बिकने के कगार पर हैं, वहीं हजारों कर्मचारियों को वर्षों से वेतन तक नहीं मिला है। ऐसे कर्मचारियों की याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट 17 नवंबर को सुनवाई करेगा।
शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सहारा कर्मचारियों की ओर से वेतन भुगतान की मांग वाली अंतरिम याचिकाओं को आगामी सोमवार यानी 17 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

अडानी प्रॉपर्टीज को 88 संपत्तियाँ बेचने का प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SICCL) की उस याचिका पर भी गौर किया, जिसमें ग्रुप ने अपनी 88 प्रमुख संपत्तियाँ अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को बेचने की अनुमति मांगी थी।
पहले से ही यह याचिका 17 नवंबर को सूचीबद्ध है। कर्मचारियों के वकीलों ने अनुरोध किया था कि वेतन संबंधी याचिकाओं को भी उसी दिन सुना जाए, क्योंकि कई कर्मचारी महीनों से बिना वेतन के हैं।
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा—
“ठीक है, उन्हें भी सूचीबद्ध किया जाएगा।”
केंद्र सरकार और सेबी से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर को ही केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय और सेबी से सहारा की इस प्रॉपर्टी-बिक्री याचिका पर जवाब मांगा था।
कोर्ट ने न्यायमित्र (Amicus Curiae) वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफड़े को निर्देश दिया कि वे इन 88 संपत्तियों का पूरा विवरण एकत्र करें और यह रिपोर्ट करें कि:
क्या ये संपत्तियाँ किसी विवाद में हैं?
किन-किन हितधारकों ने इन पर आपत्ति दर्ज की है?
संपत्तियाँ एक साथ बेची जाएं या टुकड़ों में?
कर्मचारियों के वेतन दावों की जांच
कोर्ट ने साफ कहा है कि—
सहारा ग्रुप उन कर्मचारियों के दावों की जांच करे जिनका वर्षों से वेतन बकाया है।
न्यायमित्र को वेतन और अन्य बकाया राशि का पूरा विवरण कोर्ट के सामने पेश करने को कहा गया है। शीर्ष अदालत अगली तारीख पर इस मुद्दे पर फैसला करने पर विचार करेगी।
17 नवंबर को अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप की संपत्तियों की बिक्री, कर्मचारियों के वेतन, सेबी के जवाब और अन्य सभी हस्तक्षेप याचिकाओं को मिलाकर 17 नवंबर को सुनवाई तय की है। यह तारीख सहारा कर्मियों और निवेशकों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।






