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कागजों में साफ सफाई के नाम पर मनमाने भुगतान के बाद भी , जाम पड़ी नालियां सिर्फ कागज़ों में हो रहा है साफ सफाई

  • कागजों में साफ सफाई के नाम पर मनमाने भुगतान के बाद भी , जाम पड़ी नालियां सिर्फ कागज़ों में हो रहा है साफ सफाई
    पंकज चौबे
    बढ़नी सिद्धार्थनगर
    ग्रामीण क्षेत्रों में गांव की साफ सफाई के लिए टीमों का गठन कर सफाई निर्देश के बावजूद इसके साफ-सफाई चौपट है। ग्रामीण परेशान हैं। जनप्रतिनिधि भरसक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर देखने से लगता है कि पंचायती राज विभाग द्वारा स्वच्छता अभियान सिर्फ कागजों पर ही चलाया जा रहा है। गुरुवार को बन्दे भारत न्यूज की टीम ने जब गांव जिग्निहवा उर्फ धनौरी का दौरा किया तो हालात चितनीय थे। इस अभियान के जरिए हमारी कोशिश है कि जिम्मेदार लोग कुंभकर्णी नींद से जागें और समस्या का समाधान हो सके। केंद्र से लेकर राज्य सरकार स्वच्छता अभियान को लेकर बेहद गंभीर है, लेकिन गांवों की हालत देखने पर लगता है कि यह अभियान जिले में सिर्फ केवल कागजों में दौड़ रहा है। करोड़ों खर्च होने के बाद भी इस अभियान ने आज धरातल पर कोई खास प्रगति नहीं की है। अधिकारी खुद को बचाने के चक्कर में कागजों में ही इस योजना को शिखर में पहुंचा देते हैं। गांव जिग्निहवा उर्फ धनौरी की सड़कों के हालात इसकी गवाही दे रहे हैं। नहर से गांव की ओर जाते ही सड़क पर गन्दगी भरा मिला। यहां से पैदल पार करना बेहद कठिन था। ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क नाली की कीचड़ से पटी हुई थी। इसके अलावा अन्य मार्ग पर कई जगह सड़क के बीचों-बीच कूड़े का ढेर लगा हुआ था जो कई दिन पुराना दिखाई पड़ता है। वहीं गांव से जंगल की ओर जाने वाले मार्ग पर नाली से कीचड़ निकालकर सड़क पर छोड़ दी है।
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