
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर आज (25 नवंबर) सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। 50% आरक्षण सीमा पार कर चुके जिला परिषद, नगर पालिका और नगर परिषद (नगरपंचायत-नगरपरिषद चुनाव 2025) के चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाएगा, इस पर सबकी निगाहें रहेंगी।
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्टीकरण दे और यह स्पष्ट करे कि जिन जगहों पर स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं, वहाँ 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा के भीतर ओबीसी आरक्षण कैसे दिया जाएगा। राजनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले इन चुनावों को ‘मिनी विधानसभा’ माना जाता है। इसलिए आरक्षण विवाद और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सभी राजनीतिक दलों का ध्यान केंद्रित है।
विकास गवली द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया है कि कुछ स्थानीय निकायों में आरक्षण अनुपात 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से ऊपर रखा गया है, जो कानून के विरुद्ध है। हालाँकि, राज्य सरकार का दावा है कि बंठिया आयोग की रिपोर्ट के संदर्भ में आरक्षण की संरचना उचित रूप से की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50% आरक्षण की मर्यादा का
जिला परिषद – 32 जिला परिषदों में से 17
पंचायत समिति – 336 पंचायत समितियों में से 83
नगरपालिकाएँ – नगरपालिका क्षेत्रों में 242 में से 40
नगर पंचायत – नगर पंचायतों में 46 में से 17
नगरपालिकाएँ – नगरपालिका क्षेत्रों में 29 में से 2 में उल्लंघन हुआ है ।
19 नवंबर को हुई सुनवाई में क्या हुआ? (महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव 2025)
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा है, इसलिए सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना होगा।
50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण लागू करने का आरोप अभी भी लंबित है और अदालत इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि नगर निगम चुनावों की घोषणा अभी नहीं की गई है, क्योंकि आरक्षण मानदंड और कानूनी प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है।
स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी याचिकाओं पर अब 25 नवंबर को सुनवाई होगी।










