उत्तर प्रदेशबस्ती

कपड़े की तरह धंधा बदलने वाले अमित टाटा से पूछताछ के बाद एसटीएफ उसकी जड़ें खंगलाने में जुटी

अमित को युवाओं की फौज का सरगना समझ पूर्व सांसद ने अपना खास बनाया

लखनऊ उत्तर प्रदेश 

अमित ‘टाटा’ की लखनऊ में गिरफ्तारी होने के साथ ही जरायम जगत में लोग सहमे हैं। इसलिए कि कपड़े की तरह धंधा बदलने वाले अमित टाटा से पूछताछ के बाद एसटीएफ उसकी जड़ें खंगलाने में जुटी गई है।

अजीत मिश्रा (खोजी)

ऐसे में सर्विलांस में कौन-कौन जद में आएगा कहना मुश्किल है। हरिश्चंद्र कालेज में पढ़ाई के दौरान अमित टाटा के जरायम से जुड़े दोस्तों की लंबी फेहरिस्त है, जो बदलते वक्त में रियल एस्टेट, प्लाटिंग आदि कार्यों से जुड़े हैं।

जरायम से जुड़े सूत्रों की माने तो अमित टाटा जौनपुर का मूल निवासी जरूर है, लेकिन विगत 30 वर्षों से वाराणसी में रह रहा है। शुरुआत में उसके मुन्ना बजरंगी से जुड़कर जरायम में धाक जमानी चाही लेकिन उसकी हत्या के बाद इसे ठौर की मुश्किल हो गई।

इसकी वक्त के साथ धंधा बदलने की आदत के कारण शहर के नामचीन बिल्डर का साथ पकड़ लिया। जिसके बाद फिर से स्कार्पियो की सवारी करने लगा। इसके साथ युवाओं की फौज और जौनपुर का रहवासी होने के कारण पूर्व सांसद का इसे साथ मिल गया। इसकी मंशा राजनीत में जाने थी, लिहाजा पूर्व सांसद के वाराणसी आने पर सैकड़ा युवा के साथ उनके साथ हो लेता।

अमित को युवाओं की फौज का सरगना समझ पूर्व सांसद ने अपना खास बन गया। सबकुछ ठीक चल रहा था कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व आजमगढ़ के एक युवक के जरिए शुभम जायसवाल के संपर्क में आया तो कफ सीरप की अकूत कमाई देख अमित टाटा ने फिर से धंधा बदला। शुभम के साथ काम शुरू किया तो लाखों रुपये महीने की कमाई देख बिल्डर का साथ छोड़ दिया। शुभम को भी लगा कि जौनपुर में संरक्षण मिलने पर उसके कारोबार को संरक्षण मिलेगा।

शुभम ने वादा किया था कि अमित को अपने खर्च से ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़वाएगा। सभी के स्वप्न पूरे होते उससे पूर्व ही पाप का घड़ा भरा और नशे के कारोबार में लिप्त अमित टाटा गिरफ्तार हो गया। शुभम विदेश भागने के कारण बचा है, जिसकी तलाश में एटीएफ, वाराणसी की एसआइटी लगी हुई है। जरायम के लोगों से जुड़ा तो कानून की पढाई भी की, जिससे उसे संरक्षण मिले।

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