
अजीत मिश्रा (खोजी)
⭐ पंजीकरण कहीं और जगह का संचालित हो रहा है कहीं और विभाग बना अन्जान।
⭐ अप्रशिक्षित महिला करती है अल्ट्रासाउंड, निरीह मरीजों के जान का दुश्मन बना यह सेन्टर।
⭐ प्रकरण गंभीर है जांच करा कर करायी जायेगी कार्यवाही, दोषी भी बख्शा नही जायेगा- डा0 राजीव निगम।
14 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।
बस्ती।। स्वास्थ्य महकमें के अधिकारियों का तिकडम और स्वास्थ्य माफियाओं का गठजोड निरीह मरीजों के जान का दुश्मन बना हुआ है। विभागीय अधिकारी ऐसे स्वास्थ्य माफियाओं पर आखिर महरबान क्यों है ? यह गडबडझाला किसी भी विद्वान के समझ मे नही आ रहा है। सीएमओ कार्यालय के नाक के नीचे भारत डायग्नोटिक सेन्टर मे घुसे अजब-गजब तरीके से संचालित हो रहे लाइफ अल्ट्रासाउंड सेन्टर शासनादेशों को अलग से चुनौती दे रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों को सब पता है लेकिन कार्यवाही शून्य है। इस सम्बन्ध मे सीएमओ डा0 राजीव निगम ने पूछने पर बताया कि प्रकरण गंभीर है जांच कराकर शीघ्र कार्यवाही करायी जायेगी। दोषी को कदापि बख्शा नही जायेगा।
जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय एवं सीएमओ कार्यालय के पास स्थित भारत डायग्नोटिक सेन्टर मे घुसे अजब-गजब तरीके से संचालित हो रहे लाइफ अल्ट्रासाउंड सेन्टर नाजायज गतिविधियों का अलग इतिहास लिख रहा है। बताया जाता है कि लाइफ अल्ट्रासाउंड सेन्टर का पंजीकरण कैली रोड पर कहीं पंजीकृत था। लेकिन बिना किसी विधिक कार्यवाही के भारत डायग्नोटिक सेन्टर मे घुस गया है। जिसमें डीएम का कोई अनुमोदन प्राप्त नही है। लेकिन विभागीय अधिकारियों के सह पर संचालित है। लाइफ अल्ट्रासाउंड सेन्टर मे न तो कोई चिकित्सक अल्ट्रासाउंड करता है और न ही उसका संचालक पीसीपीएनडीटी के निर्देशों का अनुपालन करता है। जिसका खामियाजा निरीह मरीजों एवं उनके परिजनों को भुगतना पड रहा है। खैर मरीज मरें या जियें इससे विभाग को क्या लेना देना है। लाइफ अल्ट्रासाउंड सेन्टर मे अल्ट्रासाउंड करने वाली महिला जो पूर्ण रूप से अप्रशिक्षित है वह मरीजों का अल्ट्रासाउंड करती है। पूछने पर वह प्रेस को अनाप शनाप जबाब देती है। वह कहती है कि सीएमओ को सब मालूम है इसमे प्रेस मेरा क्या कर लेगा। बात उसकी सही भी है जब विभागीय गंठजोड़ फिट है तो कोई क्या कर सकता है। यहां तक डीएम भी ऐसे लोगों का कुछ बिगाड़ नही सकते। यह नाजायज कार्य दो चार दिन से नही अपितु कई महीनों से संचालित हो रहा है। लाइफ अल्ट्रासाउंड सेन्टर मे कौन चिकित्सक पंजीकृत है संचालिका महिला को भी नही पता है। महिला का यही कहना है कि सीएमओ सब जानते हैं। जब स्वास्थ्य प्रशासन का यही हाल है तो नाजायज गतिविधियों का तरक्की होना तो तय है।










