
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। बस्ती: रक्षक ही बने भक्षक! वन माफिया के आगे नतमस्तक हुआ वन विभाग।।
सोमवार 19 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
🚨नदौर मार्ग पर ‘ब्रह्मा-विष्णु-महेश’ के प्रतीक पेड़ों पर चली आरी; बिजली काटकर अंधेरे में किया जा रहा ‘हरित संहार’🚨

बस्ती। प्रदेश सरकार एक ओर ‘एक वृक्ष, एक पुत्र’ का नारा देकर पर्यावरण संरक्षण की दुहाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती के जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे वन माफिया प्रकृति का गला घोंट रहे हैं। ताजा मामला बस्ती-नदौर मार्ग स्थित भिटवा चौराहे का है, जहाँ वर्षों पुराने पीपल, बरगद और आम के हरे-भरे पेड़ों को बेखौफ होकर काटा जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस विनाशकारी खेल में जिम्मेदार विभाग पूरी तरह मौन साधे बैठा है।
👉 साजिश के तहत अंधेरा: बिजली काटकर हो रही कटान
ग्रामीणों ने वन माफिया और ठेकेदारों की मिलीभगत का सनसनीखेज खुलासा किया है। आरोप है कि कटान को अंजाम देने के लिए क्षेत्र में जानबूझकर ‘लाइट इफेक्ट’ यानी बिजली की कटौती की जा रही है। पिछले कई दिनों से क्षेत्र अंधेरे में डूबा है, ताकि रात के सन्नाटे और अंधेरे का फायदा उठाकर माफिया बिना किसी डर के अपनी आरी चला सकें। यह किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है कि कैसे विभाग के संरक्षण में यह सब फल-फूल रहा है।

👉 आस्था पर प्रहार, सुरक्षा पर खतरा
जिन पेड़ों को हिंदू धर्म में ब्रह्मा-विष्णु-महेश का स्वरूप मानकर पूजा और रोपित किया जाता था, आज उन्हें माफियाओं की भेंट चढ़ा दिया गया है। सड़क किनारे से हो रही इस अंधाधुंध कटान के कारण न केवल पर्यावरण को क्षति पहुँच रही है, बल्कि सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है।
👉 गंभीर सवाल जो जवाब मांगते हैं:
🔥 प्रशासन की चुप्पी का राज क्या है? क्या इतनी बड़ी कटान बिना स्थानीय पुलिस और वन विभाग की जानकारी के संभव है?
🔥 सूचना तंत्र फेल या नीयत में खोट? पेड़ कटते समय गश्त करने वाली पुलिस और वन कर्मियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगती?
🔥 हादसे का जिम्मेदार कौन? यदि कटान के कारण या अंधेरे की वजह से कोई दुर्घटना होती है, तो क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेगा?
“जब रक्षक ही मौन हो जाएं, तो भक्षकों का मनोबल बढ़ना स्वाभाविक है। बस्ती में हरे पेड़ों का यह विनाश न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।”
अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इन माफियाओं पर नकेल कसता है या फिर कागजी नारों की आड़ में बस्ती का ‘ग्रीन कवर’ ऐसे ही माफियाओं के हत्थे चढ़ता रहेगा।










