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।। भनवापुर ब्लॉक फर्जी शिक्षक मामला: पुलिस विवेचना पूरी, तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध।।

।। फर्जी शिक्षक भर्ती का पर्दाफाश: तत्कालीन बीएसए और बीईओ पर गिरेगी गाज, पुलिस ने कसी कमर।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। सिद्धार्थनगर शिक्षक भर्ती घोटाला: बीएसए समेत तीन पर चार्जशीट की तैयारी, शासन से मांगी अनुमति।।

सोमवार 19 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

सिद्धार्थनगर।। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में हुए सनसनीखेज फर्जी शिक्षक भर्ती मामले में पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर ली है। भनवापुर ब्लॉक में हुए इस फर्जीवाड़े ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले में तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और पटल सहायक (क्लर्क) पर कानून का शिकंजा कसने वाला है।

⭐कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?

भनवापुर ब्लॉक में सहायक शिक्षकों के कुल 36 पद सृजित थे, लेकिन मिलीभगत के खेल में वहां 44 शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई। इन 8 अतिरिक्त फर्जी शिक्षकों ने न केवल स्कूलों में कार्यभार ग्रहण किया, बल्कि एक महीने से अधिक समय तक शिक्षण कार्य भी किया। मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब इनके वेतन लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई और रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गईं।

7 सितंबर 2024 को तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी विंदेश्वरी प्रसाद मिश्रा की तहरीर पर त्रिलोकपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।

⭐जांच में चौंकाने वाले तथ्य आए सामने

त्रिलोकपुर पुलिस और बिस्कोहर चौकी प्रभारी मनोज कुमार सिंह की विवेचना में जो तथ्य सामने आए हैं, वे विभागीय मिलीभगत की ओर स्पष्ट इशारा करते हैं:

👉हूबहू असली दस्तावेज: फर्जी शिक्षकों के पास मौजूद नियुक्ति पत्र और दस्तावेज इतने सटीक थे कि उन्हें पहली नजर में पहचानना मुश्किल था।

👉स्कैन हस्ताक्षर का खेल: दस्तावेजों पर तत्कालीन बीएसए और नियुक्ति लिपिक के स्कैन किए हुए डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया था।

👉मास्टरमाइंड की तलाश: पुलिस का मानना है कि विभाग के भीतर ही कोई ऐसा “मास्टरमाइंड” बैठा है, जिसने अंदरूनी सूचनाएं लीक कीं और इस पूरे खेल को रचा।

⭐बीएसए और लिपिक की भूमिका संदिग्ध

पुलिस की जांच में तत्कालीन बीएसए, संबंधित बीईओ और पटल सहायक की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। पुलिस ने इन सभी से पूछताछ के लिए सवालों की एक लंबी सूची तैयार की थी। संतुष्टिजनक जवाब न मिलने और साक्ष्यों के आधार पर अब इनके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल करने की तैयारी है।

“पुलिस ने अपनी कार्रवाई पूरी कर ली है। चूंकि मामला राजपत्रित अधिकारियों से जुड़ा है, इसलिए शासन से आरोप पत्र दाखिल करने की औपचारिक अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।”— पुलिस जांच टीम का बयान।

इस मामले में पुलिस ने पहले ही 8 फर्जी शिक्षकों और संतकबीरनगर के एक अन्य सहयोगी को आरोपित बनाया है। विभाग के भीतर छिपे सफेदपोशों पर कार्रवाई होने से जिले में हड़कंप मचा हुआ है। अब सबकी नजरें शासन की अनुमति और पुलिस की अंतिम चार्जशीट पर टिकी हैं।

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