
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। प्रशासनिक संरक्षण में फल-फूल रहा ‘अवैध’ शारदा हॉस्पिटल: न पंजीकरण, न फायर सेफ्टी, बस रसूख के दम पर खुला मौत का खेल।।
बस्ती, 19 जनवरी।। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र में एक खतरनाक ट्रेंड ने पैर पसार लिए हैं—सरकारी अस्पतालों को ‘लॉन्चिंग पैड’ बनाना और फिर इस्तीफा देकर निजी साम्राज्यों का निर्माण करना। ताजा मामला बस्ती के पचपेड़िया रोड स्थित शारदा हॉस्पिटल का है, जहाँ नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर मरीजों की जान दांव पर लगाई जा रही है।

💫मानकों को ठेंगा, चाय-नाश्ते पर उद्घाटन
जिला अस्पताल के पूर्व फिजीशियन डॉ. विवेक गौरव सचान द्वारा संचालित इस अस्पताल के पास न तो स्वास्थ्य विभाग का पंजीकरण है और न ही अग्नि शमन विभाग (Fire) की एनओसी। सूत्रों की मानें तो अस्पताल की बिल्डिंग पूरी तरह अमानवीय और असुरक्षित है। बस्ती विकास प्राधिकरण (BDA) से बिल्डिंग मैप पास कराए बिना ही करोड़ों का ढांचा खड़ा कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब बिना किसी कानूनी कागजी कार्रवाई के, कुछ रसूखदारों और बिचौलियों को चाय-नाश्ता कराकर अस्पताल का उद्घाटन भी कर दिया गया।
💫जिम्मेदारों का पल्ला झाड़ने वाला रवैया
हैरत की बात यह है कि जिले के आला अधिकारी इस अवैध संचालन से पूरी तरह वाकिफ हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल ‘फुटबॉल’ खेला जा रहा है:
🔥CMO डॉ. राजीव निगम: स्वीकार करते हैं कि अस्पताल पंजीकृत नहीं है। सवाल यह है कि बिना पंजीकरण के इलाज शुरू कैसे हुआ?
🔥BDA मुख्य अभियंता: पुष्टि करते हैं कि भवन का मानचित्र स्वीकृत नहीं है। फिर भी अवैध निर्माण पर बुलडोजर खामोश है।
🔥पुलिस प्रशासन: क्षेत्राधिकार के फेर में उलझा हुआ है। पुरानी बस्ती थाना और कोतवाली पुलिस एक-दूसरे पर गेंद डाल रहे हैं।
“क्या प्रशासन किसी बड़े अग्निकांड या मरीज की मौत का इंतजार कर रहा है? क्या बस्ती में रसूखदारों के लिए कानून के मायने अलग हैं?”
💫जनता के साथ बड़ा धोखा
आम जनता अक्सर उद्घाटन में पहुंचे वीआईपी और पत्रकारों की भीड़ देखकर यह मान लेती है कि संस्थान वैध होगा। इसी भरोसे का फायदा उठाकर ये ‘सफेदपोश’ लुटेरे बिना किसी सुरक्षा मानकों के अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। शारदा हॉस्पिटल का यह मामला भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत का एक जीता-जागता प्रमाण है।
बस्ती प्रशासन की यह ‘नींद’ तभी खुलती है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है। क्या जिलाधिकारी इस खुली मनमानी पर संज्ञान लेकर इस अवैध ‘डेथ ट्रैप’ को सील करने का साहस दिखाएंगे?










