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अंधेर नगरी, गौर ब्लॉक: क्या अधिकारियों की आंखों पर बंधी है नोटों की पट्टी?

डिजिटल इंडिया को ठेंगा: जियो-टैगिंग के दौर में कैसे हुआ मनरेगा में 'महा-घोटाला'?

अजीत मिश्रा(खोजी)

।। कलिगड़ा में मनरेगा बना भ्रष्टाचार की एटीएम: एक ही काम, दो नाम और सरकारी खजाने पर दोहरा वार।।

शनिवार 24 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। सरकारी योजनाओं में सेंधमारी और कागजों पर विकास की कहानी बुनने का हुनर कोई गौर विकासखंड के ‘कलिगड़ा’ ग्राम पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से सीखे। यहाँ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), जो गरीबों के पसीने की कमाई का जरिया होना चाहिए था, अब भ्रष्टाचार का ‘एटीएम’ बन चुका है। मामला सीधा और साफ है—एक ही प्रोजेक्ट, वही स्थान, लेकिन दो अलग-अलग सत्रों में दो अलग नाम देकर सरकारी धन का बंदरबांट कर लिया गया।

⭐कागजों पर ‘चकमार्ग’ और जेबों में ‘करोड़ों’

हैरानी की बात यह है कि जिस काम के लिए सत्र 2022-23 में भुगतान हो चुका था, उसी काम को सत्र 2024-25 में सिर्फ नाम बदलकर फिर से फाइल पर उतार दिया गया।

👉पहला दांव: “रामकृष्ण के चक से रामप्रताप के चक तक” चकमंदी निर्माण दिखाकर भुगतान उठाया गया।

👉दूसरा दांव: स्थान वही, काम वही, बस कागजों पर नाम बदलकर “वीरेंद्र के खेत से हीरालाल के चक तक” कर दिया गया और दोबारा मोटी रकम निकाल ली गई।

मौके पर कोई नया पत्थर तक नहीं लगा, लेकिन फाइलों में विकास की गंगा बह गई। यह महज एक “टाइपिंग मिस्टेक” नहीं बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय डकैती की ओर इशारा करता है।

⭐कंप्यूटर सिस्टम की ‘मर्जी’ या अधिकारियों की ‘साठगांठ’?

सवाल यह उठता है कि जब डिजिटल इंडिया के दौर में हर काम की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) होती है, तो सिस्टम ने इस धोखाधड़ी को क्यों नहीं पकड़ा? क्या कंप्यूटर खुद ही पैसा बांटने लगा है? या फिर उच्चाधिकारियों ने अपनी आँखों पर पट्टी बांध रखी है ताकि नीचे होने वाला यह ‘खेल’ बदस्तूर जारी रहे?

“यह मनरेगा के दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन है। जिस योजना का उद्देश्य गरीब मजदूरों के हाथों को काम देना था, उसका उपयोग कुछ सफेदपोश लोग अपनी तिजोरियां भरने के लिए कर रहे हैं।” — ग्रामीणों का आक्रोश

⭐अब गेंद प्रशासन के पाले में

स्थानीय निवासी अनिरुद्ध कुमार ने जिलाधिकारी बस्ती को शिकायती पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच, फर्जी भुगतान की रिकवरी और दोषियों पर FIR की मांग की है। अब बड़ा सवाल यह है कि:

🔥क्या इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर प्रशासन कोई कड़ा एक्शन लेगा?

🔥क्या कागजी विकास दिखाने वाले ‘कलम के जादूगर’ सलाखों के पीछे होंगे?

🔥या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल भी धूल फांकते हुए किसी दफ्तर के कोने में दफन हो जाएगी?

💫जनता जवाब चाहती है और दोषियों पर ‘गाज’ गिरते हुए देखना चाहती है।

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